कुंदन कुमार, पटना। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल गुरुवार (20, अगस्त) को राजधानी पटना में ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ की शुरुआत की थी। वहीं, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा कल शनिवार (22, अगस्त को) गयाजी में ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि, इस दौरान किसानों को लेकर चलाई जा रही योजनाओं का समीक्षा भी की जाएगी। कहां कौन सी दिक्कतें आ रही हैं? इस पर चर्चा कर उसका समाधाना किया जाएगा।

हर जिले में होगा किसान संवाद का आयोजन- विजय सिन्हा

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि, बिहार के किसानों को जिन योजनाओं से हमें लाभ देना है। वो कितना कारगर हो रहा है? इसकी भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि, हम चाहते हैं कि बिहार के किसान को किसी भी तरह की दिक्कत कृषि कार्य करने में नहीं हो। इसको लेकर हम कार्य कर रहे हैं।

सिन्हा ने कहा कि, केंद्रीय कृषि मंत्री ने यहां आकर किसान कल्याण संवाद की शुरुआत कर दिया है और बिहार के किसानों को किस-किस योजना से क्या फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है? इस जानकारी भी हम सभी जिलों में किसानों को संवाद कार्यक्रम कर देंगे।

किसान देश की आधारशिला- शिवराज सिंह चौहान

बता दें कि कल पटना में ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ की शुरुआत करने के साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा था कि, किसान देश की आधारशिला हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार उनकी आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आईसीएआर के प्रदर्शन मॉडल और बिहार के सफल किसानों का उदाहरण देते हुए छोटे-खेतों में आय बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर जोर दिया। कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।

किसानों की समस्या सुन लिया सुझाव

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मिलकर उनकी समस्याएं भी सुनी और सुझाव जानें। वहीं, केंद्र की नीतियों व सफल कृषि मॉडलों का परिचय भी दिया। उन्होंने कहा कि, धरती पर अगर कोई भगवान है, तो वह किसान है और किसान की सेवा उनकी प्राथमिकता है। शिवराज ने खास तौर पर छोटे-किसानों की बेहतरी के लिए बताया कि कम जमीन पर भी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से स्थिर आय संभव है।

साझा किया इंटीग्रेटेड फार्मिंग का विवरण

इस दौरान कृषि मंत्री ने आईसीएआर के पूर्वी परिसर में लागू इंटीग्रेटेड फार्मिंग का विवरण साझा किया। उदाहरण के रूप में उन्होंने बताया कि, 2-3 बीघे के मॉडल में धान के बाद खेतों को चार हिस्सों में बांटकर गेहूं, चना, सरसों और मक्का लगाया जा रहा है। साथ ही भू-तालाब में मछली पालन, पोल्ट्री यूनिट, बतख पालन, बेल वाली सब्जियां, फलदार पेड़ और चारा खेत की व्यवस्था से परिवार की आय महीने-दर-महीने बढ़ती रहती है। ऐसे समेकित मॉडल में विभिन्न आय स्रोतों के कारण सालभर आमदनी स्थिर रहती है और कई परिवारों की वार्षिक आमदनी लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है।

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