कुंदन कुमार/पटना। बिहार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने आज भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन और मरम्मति कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जन-कल्याणकारी नीतियों और प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारने के संकल्प को दोहराते हुए मंत्री ने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान मंत्री शैलेन्द्र ने परियोजना के हर पहलू की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली जीवनरेखा है अतः इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि हर हाल में 30 नवंबर 2026 तक मरम्मत कार्य को पूर्ण कर इसे यातायात के लिए सुगम बनाया जाए। मंत्री ने निर्माण के प्रत्येक चरण में उच्च स्तरीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के पालन पर बल देते हुए कहा कि आम जनता की सुविधा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।



तकनीकी समन्वय और चुनौतियों का निराकरण
सेतु के डिस्मेंटलिंग (ध्वस्तीकरण) कार्य और स्टेजिंग के निर्माण की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कार्यदायी एजेंसियों को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। सेतु के पुनर्निर्माण में आ रही तकनीकी चुनौतियों के समाधान हेतु उन्होंने बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया ताकि बेली ब्रिज को सुरक्षित रूप से हटाया जा सके और भविष्य के निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के गति पकड़ सकें।
जन-सुविधा और सुगम आवागमन सरकार की प्राथमिकता
मीडिया से बात करते हुए शैलेन्द्र ने कहा हमारी सरकार सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के माध्यम से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसे आधुनिक मानकों के अनुरूप दुरुस्त करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अभियंताओं को नियमित रूप से व्यक्तिगत निगरानी करने और प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट सौंपने का भी आदेश दिया।
क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल भागलपुर बल्कि आसपास के कई जिलों की संपर्क व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार आएगा। आवागमन सुगम होने से व्यापार शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी जिससे पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अधिकारियों के सक्रिय सहयोग और विभागीय तत्परता से यह सेतु निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने गौरवशाली स्वरूप में वापस लौटेगा।

