सुरेंद्र जैन, धरसींवा। औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा की ग्राम पंचायत सोंडरा में प्रस्तावित श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज प्लांट की पर्यावरणीय जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने प्लांट का शांतिपूर्ण ढंग से जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने वायु एवं भूजल प्रदूषण के साथ ही श्रमिकों के शोषण का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। क्रांति सेना के सेनानियों ने भी जोर-शोर से विरोध दर्ज कराया। हालांकि, कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह कहते हुए प्लांट का समर्थन किया कि प्लांट लगने से रोजगार के साधन बढ़ेंगे।

इस जनसुनवाई में अधिकांश जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े कुछ नेताओं ने प्लांट का समर्थन करते हुए कहा कि प्लांट स्थापित होने से ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। वहीं, क्रांति सेना और आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण तथा कन्हरा-पठारीडीह के दूषित हो चुके भूजल का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि भविष्य में यहां भी भूजल दूषित हो सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण मंडल पर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए और कहा कि आज तक किसी प्लांट पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से प्रदूषण भयावह रूप ले चुका है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जून 2023 में इसी गांव के ग्रामीणों ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर पर्यावरण संरक्षण मंडल को लिखित शिकायत की थी, लेकिन वर्षों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

क्या कहते हैं प्रस्तावित प्लांट के डायरेक्टर

प्रस्तावित श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज प्लांट के डायरेक्टर राजेश तायल ने कहा कि उनके प्रस्तावित प्लांट के बनने के बाद छोकरा नाला या जमीन के अंदर एक बूंद भी केमिकलयुक्त पानी नहीं जाने दिया जाएगा। इसके लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी और भूजल दूषित नहीं होने दिया जाएगा।

एडीएम ने क्या कहा?

पर्यावरणीय जनसुनवाई के पश्चात एडीएम रायपुर ने बताया कि जनसुनवाई में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण रूप से अपना-अपना पक्ष रखा। सभी की बातों को रिकॉर्ड भी किया गया है, जिसे पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजा जाएगा, जहां से अंतिम निर्णय होगा।

क्रांति सेना ने किया विरोध

श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज की जनसुनवाई का क्रांति सेना ने विरोध करते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। क्रांति सेना के जिला उपाध्यक्ष गोविंद वर्मा ने कहा कि उद्योगपति पहले छोटा प्लांट बताकर दो-तीन एकड़ में प्लांट लगाते हैं और फिर इतना प्रदूषण फैलाते हैं कि आसपास की जमीन बंजर होने लगती है। किसान परेशान हो जाते हैं और उनकी करोड़ों रुपये की जमीन को उद्योगपति लाखों रुपये में खरीदकर फैक्ट्री का विस्तार करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण से किसान और आमजन सभी परेशान हैं। इसलिए क्रांति सेना ने यहां केमिकल प्लांट का विरोध किया है और जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की है।

एनएसयूआई नेता ने किया समर्थन

ग्रामीणों के भारी विरोध के बीच अधिकांश जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज का समर्थन किया। एनएसयूआई के देवेंद्र खेलवाड़ ने कहा कि वह इस फैक्ट्री का समर्थन करते हैं, क्योंकि इससे यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा।

भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने किया विरोध

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ट्रेड यूनियन ने श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज की सार्वजनिक सुनवाई का कड़ा विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपा। यूनियन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा कि प्रस्तावित श्रीराम ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज क्षेत्र के नागरिकों, किसानों और युवाओं के लिए भविष्य में खतरा बनेगी। क्षेत्र के जल, वायु, मिट्टी, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर यूनियन ने चिंता व्यक्त की।

यूनियन ने परियोजना को पर्यावरणीय अनुमति देने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों, अनुमतियों और पर्यावरणीय प्रभावों का उचित परीक्षण करने की मांग की। साथ ही भूजल दोहन के लिए वैध NOC प्रस्तुत करने, छोकरा नाला के संबंध में संबंधित विभाग की NOC प्रस्तुत कराने, संभावित प्रदूषण, रासायनिक जोखिम और कृषि पर प्रभाव का स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक अध्ययन करने तथा सभी पर्यावरणीय, जल एवं सुरक्षा संबंधी अनुमतियां स्पष्ट एवं वैध रूप से उपलब्ध होने तक पर्यावरणीय अनुमति पर निर्णय स्थगित रखने की मांग की। यूनियन ने कहा कि यदि अनुमति दी गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा।

इस दौरान यूनियन के पदाधिकारी रतन सोलंकी, ब्लॉक अध्यक्ष, रूपेश बघेल, पूर्व किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष, रायपुर, आयुष वर्मा, शशिकांत कश्यप, वेदप्रकाश कश्यप, खिलावन साहू और सौरभ बंजारे मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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