सुप्रिया पांडेय, रायपुर. 76 जवानों की शहादत वाले ताड़मेटला नक्सली हमले () में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों के बरी के फैसले को बरकरार रखा है. इसे लेकर प्रदेश में सियासी बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है. कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ताड़मेटला मामले में पुलिस ने जिन्हें दोषी बनाया, अदालत ने उन्हें बरी कर दिया. निचली अदालत पहली उन्हें बरी कर चुकी थी, अब हाईकोर्ट ने उसी फैसले को बरकरार रखा है.

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में जब भी ऐसी गंभीर घटनाएं हुई असली दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, गरीब आदिवासियों को आरोपी बनाकर प्रस्तुत किया गया, उनके खिलाफ पुलिस कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई. कांग्रेस पहले से कहते आ रही है कि सरकार गरीब आदिवासियों को प्रताड़ित करने की कोशिश कर रही है. ताड़मेटला का मामला हो चाहे झीरम का, असली दोषी सलाखों के बाहर हैं. सिर्फ खानापूर्ति की कार्रवाई हुई है. घटना में सीआरपीएफ के 75 और जिला पुलिस बल का एक जवान शहीद हुआ, उनको हम न्याय नहीं दिला पाए. यह तत्कालीन भाजपा सरकार की अकड़मड़ता थी. 

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फिजूल खर्च से मनाया जा रहा सुशासन तिहार, कांग्रेस का आरोप

प्रदेश में सरकार के सुशासन तिहार पर कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील शुक्ला ने हमला बोला और कहा कि सुशासन तिहार पूरी तरह विफल है, जनता को सरकार पर भरोसा नहीं है. जनता नहीं आ रही है. प्रशासन कुछ लोगों को एकत्रित कर फर्जी आवेदन प्रस्तुत करता है. फिजूल खर्ची कर इस त्यौहार को मनाया जा रहा है. 8 लाख से ज्यादा आवेदन पिछली सुशासन तिहार के समय के पेंडिंग है, इसलिए लोग इस बार सुशासन तिहार में शामिल नहीं हो रहे हैं.