Dharm Desk – सावन मास आते ही प्रकृति का रंग बदल जाता है। प्रकृति हरे रंग की चादर ओढ़ लेती है। इसी के साथ महिलाओं के श्रृंगार में भी हरे रंग की खास जगह बन जाती है। बाजारों में हरी चूड़ियों, हरी साड़ियों, हरे सूट और मेहंदी की मांग बढ़ जाती है। खासकर सुहागिन महिलाएं सावन के दिनों में हरे रंग को अपने श्रृंगार का हिस्सा बनाना पसंद करती है, कहीं महिलाएं हाथों में हरी चूड़ियों की खनक सजाती है तो कहीं हरे रंग की साड़ी या लहरिया पहनकर सावन के उत्सव में शामिल होती हैं। हरियाली तीज और सावन के अन्य पर्वों पर यह परंपरा और भी खास नजर आती है, लेकिन आखिर सानव में हरे रंग को इतना महत्व क्यों दिया गया है? हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा केवल फैशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इकेस पीछे प्रकृति, शिव-पार्वती आराधना, सौभाग्य और सनातन संस्कृति से जुड़ी कई मान्यताएं भी बताई जाती हैं।

सावन और हरे रंग का खास रिश्ता

सावन वर्षा ऋतु का वह सयम है जब पेड़-पौधों और खेतों में नई हरियाली दिखाई देने लगती है। सूखी धरती पर हरियाली लौटना जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है । इसी कारण हरे रंग को सावन की पहचान के रूप में देखा जाने लगा। धार्मिक परंपराओं में हरा रंग प्रसन्नता, समृद्धि, उन्नति और जीवन शक्ति से भी जोड़ा जाता है।

हरी चूड़ियों को क्यों माना जाता है शुभ

चूड़ियां सुहाग और सौभाग्य से जुड़ी हैं। सावन में जब इन्हें हरे रंग के साथ जोड़ा जाता है तो यह प्रकृति और सौभाग्य दोनों का प्रतीक बन जाती हैं। सुहागिन महिलाएं हरी चूड़ियां पनहकर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। चूड़ियों की खनक को भी घर में आनंद और सकारात्मक माहौल से जोड़कर देखा जाता है।

सावन में साड़ी और हरे वस्त्र पहनने की परंपरा

सावन में केवल चूड़ियां ही नहीं, बल्कि हरे रंग की साड़ी, शूट और अन्य पारंपरिक कपड़े पहनने का चलन भी है। हरियाली तीज जैसे अवसरों पर महिलाएं विशेष रूप से हरे रंग के परिधान पहनकर श्रृंगार करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं एक साथ झूला झूलती हैं, लोक गीत गाती हैं। सावन के पारंपरिक उत्सव में शामिल होती हैं। इससे यह रंग केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि महिलाओं के सामूहिक उत्सव और संस्कृति का हिस्सा भी बन गया है।

शिव-पार्वती की पूजा से जुड़ा है श्रृंगार

सावन भगवान शिव की आराधना का प्रमुख महीना है। वहीं महिलाओं के लिए माता पार्वती सौभाग्य और दांपत्य जीबन की आदर्श मानी जाती हैं। इसलिए सावन में शिव-पार्वती की पूजा के साथ सुहाग से जुड़े श्रृंगार को विशेष महत्व दिया जाता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी और हरे कपड़े इसी पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा बनकर पीढ़ियों से आगे बढ़ते आए हैं।

सावन में हरा रंग सिर्फ फैशन नहीं

आज हरे रंग की चूड़ियां और कपड़े सावन के फैशन का हिस्सा जरूर बन गए हैं, लेकिन इनके पीछे भारतीय लोकपरंपरा और धार्मिक भावनाओं की गहरी छाप है । यही वजह है कि सावन आते ही हरी चूड़ियों की खनक, मेहंदी की खुशवू और हरे परिधानों की रौनक बाजारों से लेकर घरों तक दिखाई देने लगती है।