दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने युवक को बड़ी राहत देते हुए उसके किशोरावस्था से जुड़े आपराधिक रिकॉर्ड हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने SCRB को आदेश दिया कि युवक के पुराने रिकॉर्ड को हटाया जाए, ताकि उसे पासपोर्ट जारी करने में आ रही दिक्कत दूर हो सके। मामले में युवक का कहना था कि किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक रिकॉर्ड की वजह से उसका पासपोर्ट आवेदन लंबित चल रहा था। रिकॉर्ड सिस्टम में मौजूद होने के कारण उसे बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जबकि मामला काफी पुराना था।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किशोर न्याय कानून का उद्देश्य बच्चों और किशोरों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना है, न कि उनके पुराने रिकॉर्ड के आधार पर जीवनभर दंडित करना। अदालत ने माना कि ऐसे रिकॉर्ड भविष्य में शिक्षा, रोजगार और यात्रा जैसे अधिकारों में बाधा नहीं बनने चाहिए। अदालत ने कहा किशोरों को “भूल जाने का अधिकार” पूरी तरह प्राप्त है और इससे किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा-24 का उद्देश्य नाबालिगों के भविष्य को सुरक्षित रखना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बचपन में हुई गलती को जीवनभर का कलंक नहीं बनाया जा सकता।

क्या था युवक का अपराध

युवक ने अदालत को बताया कि वर्ष 2000 में, जब वह नाबालिग था, उसके न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। युवक पर आरोप था कि उसने DTC की बस में यात्रा के दौरान फर्जी पास का इस्तेमाल किया था। जांच के बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां जुर्माना भरने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। हालांकि, वर्षों बाद यही मामला उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया।

याचिकाकर्ता ने बताया कि पिछले साल उसने विदेश में नौकरी के लिए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। हालांकि, पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने पर आवेदन रद्द कर दिया गया। मामले में अधिकारियों ने युवक का पासपोर्ट आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उसके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है, इसलिए पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता। युवक ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमा समाप्त होने के बाद किशोर के अपराध को न तो अयोग्यता माना जा सकता है और न ही उसे सामाजिक कलंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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