नीलोखेड़ी में आगामी उत्सव से पहले एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ नागरिकों ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान झेले गए अपने दर्द और संघर्षों को साझा किया। इन कहानियों को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। कार्यक्रम के दौरान नीलोखेड़ी के निर्माण और इतिहास को लेकर कई पुरानी यादें ताजा की गईं।

100 साल के बुजुर्ग ने सुनाई विभाजन की दर्दभरी दास्तान
कार्यक्रम के सबसे मुख्य आकर्षण 100 वर्षीय बेला राम रहे। उन्होंने विभाजन काल के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय उनकी उम्र लगभग 21 वर्ष थी। उन्होंने अपनी आंखो के सामने अपने परिवार के 5 सदस्यों को आग में जलते हुए देखा था। बेला राम ने बताया कि उनके परिवार ने अपना धर्म बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी इस पीड़ादायक कहानी को सुनकर पूरा सभागार स्तब्ध और भावुक हो उठा।
इतिहास को संजोने का अनूठा प्रयास
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की असली धरोहर हैं। नीलोखेड़ी आज जिस मुकाम पर है, वह इन बुजुर्गों के संघर्ष और कड़ी मेहनत की वजह से ही संभव हो पाया है। डॉ. चौहान ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने के लिए इन अनुभवों को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है।
डॉक्यूमेंट्री में शामिल होंगी यादें
संस्थान ने सभी बुजुर्गों को सम्मान स्वरूप पगड़ी भेंट की। डॉ. चौहान ने घोषणा की कि इन वरिष्ठ नागरिकों के संस्मरणों को आगामी नीलोखेड़ी उत्सव के लिए बनाई जा रही विशेष डॉक्यूमेंट्री में शामिल किया जाएगा। इससे नई पीढ़ी यह जान पाएगी कि नीलोखेड़ी के विकास के पीछे कितना कठिन संघर्ष छिपा है। कार्यक्रम में पार्षद अंजना कुमारी और सुरेंद्र शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।
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