हरियाणा सरकार ने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी सरकारी विभागों और 900 से अधिक निजी संस्थानों में आंतरिक समितियां गठित की हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के बाद कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में अब कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा केवल एक औपचारिक नियम नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता बनती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षित माहौल को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब सभी सरकारी विभागों के साथ-साथ 900 से अधिक निजी संस्थानों में भी आंतरिक समितियां गठित कर दी गई हैं, ताकि किसी भी महिला को कार्यस्थल पर अकेला या असुरक्षित महसूस न करना पड़े।

महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के प्रति सरकार ने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई है। शिकायतों की गोपनीय और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के साथ-साथ पीड़ित महिलाओं को प्रताड़ना और दबाव से बचाने के भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

सरकार का मानना है कि जब महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगी, तभी वे आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगी और समाज की प्रगति में बराबरी से भागीदारी निभा सकेंगी। यही कारण है कि राज्य के सभी 22 जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और लगातार जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

अब महिलाएं अपने संस्थान की आंतरिक समिति, जिला स्तर की स्थानीय समिति या केंद्र सरकार के ‘She-Box’ पोर्टल के जरिए भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। सरकार ने साफ किया है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।