शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में शराब के सेवन को लेकर बेहद हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में शराब की शौकीन महिलाओं का प्रतिशत न सिर्फ पिछले सर्वे के मुकाबले बढ़ा है, बल्कि यह अब राष्ट्रीय औसत को भी पार कर गया है। इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जहां एक तरफ पूरे देश में महिलाओं के बीच शराब पीने की प्रवृत्ति में कमी आई है, वहीं मध्य प्रदेश में इसके विपरीत ग्राफ ऊपर की ओर गया है।

राष्ट्रीय औसत से आगे एमपी की महिलाएं, बीयर पहली पसंद

सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश के नागरिकों के मादक पदार्थों के सेवन को लेकर कई चौंकाने वाले बिंदु सामने आए हैं। देश में महिलाओं के शराब सेवन का राष्ट्रीय औसत जहां 1.01% है, वहीं मध्य प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की 1.2% महिलाएं शराब का सेवन कर रही हैं। पिछले सर्वेक्षण (NFHS-5) में मध्य प्रदेश की केवल 01 फीसदी (1%) महिलाओं में शराब सेवन की बात सामने आई थी, जो अब बढ़कर 1.2% हो गई है। बीते सर्वे के आंकड़ों से तुलना करें तो प्रदेश में पुरुषों की अपेक्षा शराब पीने वाली महिलाओं के प्रतिशत में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ है कि मध्य प्रदेश में महिलाओं और पुरुषों के बीच ‘बीयर’ सबसे पसंदीदा मादक पेय पदार्थ (Alcoholic Beverage) बनकर उभरा है।

राष्ट्रीय रुझान के विपरीत एमपी के आंकड़े

NFHS-6 की इस रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि मध्य प्रदेश का ट्रेंड देश के बाकी राज्यों से बिल्कुल विपरीत दिशा में जा रहा है। देश भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो ओवरऑल भारतीय महिलाओं में शराब पीने की आदत में गिरावट (कमी) आई है, लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा घटने के बजाय और बढ़ गया है।

कैसे और कहां हुआ यह महा-सर्वेक्षण?

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण को बेहद वैज्ञानिक और बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया है।

715 जिलों में सर्वे: इस ताजा रिपोर्ट को तैयार करने के लिए देश भर के 715 जिलों को कवर किया गया था।
6.79 लाख परिवार शामिल: देश भर के लगभग 6.79 लाख परिवारों से सीधे बात कर यह डेटा जुटाया गया है।
लंबी चली जांच प्रक्रिया: मध्य प्रदेश में इस सर्वे का काम 13 फरवरी से लेकर 25 दिसंबर के बीच व्यापक स्तर पर किया गया था, जिसकी रिपोर्ट अब साझा की गई है।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, महानगरीय संस्कृति का प्रभाव और सामाजिक स्वीकार्यता के चलते ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बहरहाल, NFHS-6 के ये आंकड़े निश्चित रूप से नीति निर्माताओं और समाज के लिए एक नई बहस की शुरुआत कर रहे हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m