वीरेंद्र कुमार, नालंदा। राजगीर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला-2026 का सफल समापन हो चुका है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मलमास मेले के विस्तृत आंकड़े जारी किए। प्रशासन के अनुसार 17 मई से 15 जून तक चले एक माह के इस मेले में लगभग 3 करोड़ 82 लाख श्रद्धालु एवं पर्यटक राजगीर पहुंचे और विभिन्न कुंडों व जलधाराओं में आस्था की डुबकी लगाई।

विशेष शाही स्नान पर साधु-संतों ने लगाई डुबकी

इस एक महीने के दौरान श्रद्धालुओं और नागा संन्यासी सहित विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों के लिए तीन विशेष शाही स्नान आयोजित किए गए। वहीं, मलमास मेले के दौरान बनाए गए 15 आवास स्थलों पर 13 लाख 87 हजार 912 श्रद्धालुओं ने अस्थायी ठहराव की सुविधा प्राप्त की। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1200 दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तथा करीब 5000 पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी 426 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की गई।

प्रथम शाही स्नान: 27 मई 2026 (एकादशी)
द्वितीय शाही स्नान: 31 मई 2026 (पूर्णिमा)
तृतीय शाही स्नान: 11 जून 2026 (एकादशी)

5,969 बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाया गया

मलमास मेले के दौरान खोया-पाया केंद्र की मदद से 5,969 बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। वहीं 1514 वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर के माध्यम से ब्रह्मकुंड तक पहुंचाकर स्नान कराया गया। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 7 अस्थायी अस्पताल, 20 स्वास्थ्य शिविर, 16 एम्बुलेंस और 377 चिकित्साकर्मियों की तैनाती रही। मेले के दौरान 1 लाख 5 हजार 419 श्रद्धालुओं का इलाज किया गया। डीएम कुंदन कुमार ने कहा कि व्यापक तैयारी, तकनीकी निगरानी और बेहतर समन्वय के कारण पूरा मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

जानें क्या हैं पौराणिका मान्यताएं?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के दौरान राजगीर की पवित्र सरस्वती नदी और ब्रह्मकुंड में एक दिन का स्नान, गंगा नदी में वर्ष भर स्नान करने के समान पुण्यदायी माना जाता है। इसी कारण इस पावन महीने में देश के कोने-कोने से साधु-संत, महात्मा और आम श्रद्धालु मोक्ष और आत्मशुद्धि की कामना लिए राजगीर पहुंचते हैं।

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