Dharm Desk – सावन का महीना भगवान शंकर की आराधना के लिए विशेष है। मंदिरों में सुबह से ही शिव भक्तों की भीड़ नजर आती है। भक्त भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं बेलपत्र चढ़ाते हैं और ओम नमः शिवाय का जप करते हुए भोलेनाथ की पूजा करते हैं। सावन में शिवलिंग पर जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की विशेष परंपरा है। हालांकि पूजा करते समय कुछ नियमों का ध्यन रखना भी जरूरी है। शिवलिंग पर सभी पूजन सामग्री नहीं चढ़ाई जाती। कुछ चीजें भगवान शंकर की पूजा में वर्जित मानी गई हैं। इसी तरह बेल पत्र चढ़ाने से लेकर जलाभिषेक करने और पूजा स्थल की स्वच्छता तक कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं सावन में शिवलिंग की पूजा करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए।

शिवलिंग पर ना चढ़ाए यह सामान

शिवलिंग पर हल्दी सिंदूर और कुम-कुम न चढ़ाएं, भगवान शंकर की पूजा में हल्दी सिंदूर और कुम-कुम अर्पित करने से बचना चाहिए। इन सामग्रियों का उपयोग मुख्य रूप से देवी पूजा और सुहाग से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र ही चढ़ाने की परंपरा है।

सामग्री चढ़ाते समय विधि का ध्यान रखें

  • बेलपत्र अर्पित करते समय इन बातों का ध्यान रखना चहिए, भोलेनाथ की पूजा में बेल पत्र का विशेष महत्व है। भगवान शंकर को बेलपत्र चढ़ाते समय साफ और अखंड बेलपत्र लेना चाहिए।
  • सूखा या फटा हुआ कीड़े लगा बेल पत्र चढ़ाने से बचना चाहिए।
  • तीन पत्तियों वाला बेल पत्र पूजा में विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाते समय उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखने की परंपरा है।

तुलसी और केतकी का फूल न चढ़ाए

शिवलिंग की पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं करने चाहिए, इसी तरह केतकी यानी केवड़े का फूल भी भगवान शंकर को चढ़ाना वर्जित माना जाता है। इसलिए पूजा की थाली तैयार करते समय इन दोनों चीजों को अलग रखना चाहिए और शिवलिंग पर वही सामग्री अर्पित करनी चाहिए जो शिव पूजा के लिए उचित मानी जाती है।

जलाभिषेक आराम से करें

  • सावन में जलाभिषेक करते समय जल्द बाजी करने के बजाय शांत मन से भगवान शंकर का ध्यान करना चाहिए। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाते हुए ओम नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना जाता है।
  • अभिषेक के दौरान पूजा स्थल पर पानी इधर-उधर न फैलाएं और मंदिर की व्यवस्था व स्वच्छता का भी ध्यान रखें।
  • दूध से अभिषेक करने के बाद साफ जल चढ़ाना चाहिए, यदि भगवान शंकर का दूध से अभिषेक कर रहे हैं तो उसके बाद साफ जल चढ़ाने की परंपरा है।
  • पूजा में इसतेमाल होने वाली सामग्री को इधर-उधर फैलाने के बजाय व्यवस्थित तरीके से अर्पित करना चाहिए।
  • मंदिर या घर के पूजा स्थान को भी साफ-सुथरा रखना जरूरी है।
  • पूजा के साथ आचरण का भी रखें ध्यान रखना चाहिए शिव आराधना के दौरान केवल पूजा-पाठ ही नहीं बल्क अपने व्यवहार में भी संयम रखना चाहिए।
  • गुस्सा झूठ अपशब्द बोलने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। श्रद्धा, शांति और अच्छे आचरण के साथ की गई पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
  • सावन में शिव मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में दर्शन के दौरान धक्का-मुक्की न करें और दूसरे भक्तों की पूजा में बाधा न डालें । अपनी बारी आने पर शांतपूर्वक जलाभिषेक और दर्शन करें।
  • यदि मंदिर जाना संभव न हो तो घर पर भगवान शंकर का ध्यान करके ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जा सकता है।