हिसार। हरियाणा में मानसून का मिजाज अब बदल गया है। इस समय मानसून मुख्य रूप से राज्य के उत्तरी हिस्सों में अपना असर दिखा रहा है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से नदियां और बरसाती नाले पूरी तरह उफान पर आ गए हैं। इसके चलते मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

यमुना और मारकंडा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा

हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से लगातार आ रहे पानी के कारण यमुना और मारकंडा नदियों का जलस्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसके चलते कई गांवों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति बन गई है। करनाल और सोनीपत जैसे जिलों में तो नदी के तेज बहाव से जमीन का कटाव भी शुरू हो गया है। पानी भरने के कारण आसपास के सैकड़ों एकड़ खेत पूरी तरह डूब गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार आज रविवार को उत्तरी हरियाणा के पंचकूला और यमुनानगर जिलों में बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।

इन जिलों में होगी बूंदाबांदी और यहां सूखा रहेगा मौसम

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल और करनाल में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके अलावा जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में केवल हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। दूसरी तरफ सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी और चरखी दादरी में मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क रहने का अनुमान लगाया गया है।

पिछले 24 घंटों में कहां कितनी बरसी आफत

राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बारिश यमुनानगर के बिलासपुर में 70 मिलीमीटर यानी 7 सेंटीमीटर रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा प्रतापनगर, जगाधरी, छछरौली, सढौरा और चंडीगढ़ में 5-5 सेंटीमीटर पानी बरसा है। वहीं फिरोजपुर झिरका, पेहोवा और बालसमंद में 4-4 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई है। इस हरियाणा में मानसून का अलर्ट के बीच प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना हो गया है।

मारकंडा नदी के पानी से घिरे कई गांव

कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ने से शाहाबाद क्षेत्र के 4 गांव कठवा, कलसाना, तंगोर और मोहनपुर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। नदी में शनिवार सुबह 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी पहुंच गया था। सबसे खराब हालात कठवा गांव में देखने को मिले। यहां की मुख्य सड़क पानी में डूब गई है जिससे लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। बच्चों को ले जाने वाली स्कूल बस के टायर पानी में पूरी तरह डूब गए। हालांकि बाद में पानी का बहाव घटकर 11 हजार क्यूसेक के आसपास रह गया।

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