सिंचाई विभाग मानसून से पहले यमुनानगर की प्रमुख नदियों के तटों को ₹40 करोड़ की लागत से पक्का कर रहा है, जिसकी समय सीमा 15 जून निर्धारित की गई है।

परवेज खान, यमुनानगर। जिले में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए सिंचाई विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। पिछले साल आई भीषण बाढ़ और भारी जलभराव से हुए नुकसान से सबक लेते हुए, विभाग ने इस बार समय से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। यमुनानगर की तीन प्रमुख नदियों—यमुना, पथराला और सोम नदी के किनारों को करीब 40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से मजबूत किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना का मुख्य उद्देश्य बरसात के दौरान होने वाले भूमि कटाव को रोकना और रिहायशी इलाकों को बाढ़ की चपेट में आने से बचाना है। विभाग ने इन सभी सुरक्षा कार्यों को पूरा करने के लिए 15 जून की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है।

तिहानो गांव में बचाव कार्य

प्रशासन का सबसे ज्यादा फोकस तिहानो गांव के पास सोम नदी के तट पर है, जहां सुरक्षा कार्य तेजी से चल रहा है। पिछले साल मानसून के दौरान सोम नदी का जलस्तर बढ़ने से इस क्षेत्र में भारी तबाही मची थी, जिसमें तिहानो गांव की करीब 80 प्रतिशत फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। जलमग्न हुए खेतों और घरों के कारण किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। इसी कड़वे अनुभव को देखते हुए, सिंचाई विभाग यहाँ पत्थरों के जरिए तटों को स्थाई रूप से मजबूत बना रहा है। वर्तमान में मशीनों और श्रमिकों की सहायता से दिन-रात काम जारी है ताकि नदी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके और पानी गांवों में न घुसे।

15 जून तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य

सिंचाई विभाग के एक्सईन (XEN) राहिल सैनी के अनुसार, अकेले तिहानो गांव में सोम नदी के किनारों को पक्का करने पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस स्थाई समाधान से मानसून के दौरान गांव को कोई खतरा नहीं होगा। ग्रामीणों ने भी इस पहल पर राहत जताई है, क्योंकि हर साल फसलों और घरों को होने वाले नुकसान से उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता था। प्रशासन की पैनी नजर अब नदी क्षेत्रों पर बनी हुई है, ताकि समय रहते सभी संवेदनशील बिंदुओं को सुरक्षित किया जा सके और पिछले वर्ष जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।