सतीश सिंह, अयोध्या. श्री अयोध्या धाम स्थित दिगंबर अखाड़ा में ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज के पुण्य स्मृति महामहोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास केवल गौरव का विषय नहीं, बल्कि उससे सीख लेने का माध्यम भी है. अतीत की गलतियों की अनदेखी करने का अर्थ उन्हें दोहराने का प्रयास करना है.

शुक्रवार को अयोध्या के दिगम्बर अखाड़ा में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के गुलाम होने के पीछे सबसे बड़ी कमी एकता की थी. उन्होंने कहा, “एक दिशा में, एक स्वर में, एक साथ चलने की कमी थी. हम बंटे थे और इसीलिए कटे थे.” उन्होंने 1526 में संभल और 1528 में अयोध्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उस समय समाज एकजुट होकर खड़ा होता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं.

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14 अगस्त का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि विभाजन के समय केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटे, बल्कि भारत भी बंटा था. उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को लेकर विपक्षी नेताओं पर भी सवाल उठाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के भीतर किसी घटना पर मुखर होने वाले नेताओं की आवाज पड़ोसी देशों में हिंदुओं के साथ होने वाली घटनाओं पर सुनाई नहीं देती.

संभल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां हरिहर मंदिर के अलावा 67 तीर्थ और 19 कूप भी थे, जिन पर कब्जे की जानकारी सामने आई. सरकार ने कब्जे हटवाने की कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि करीब 10 हजार एकड़ भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है और गरीबों, दलितों तथा कमजोर वर्गों को भूमि आवंटित करने के साथ सरकारी लैंड बैंक भी बनाया जा रहा है. संभल में जिला मुख्यालय के निर्माण की भी बात उन्होंने कही.

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राम जन्मभूमि से जुड़े चढ़ावे के मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की सिफारिश पर एसआईटी गठित हुई और उसके अनुसार कार्रवाई चल रही है. उन्होंने कहा कि अपराधी के खिलाफ कार्रवाई हुई है और इस मामले में “दूध का दूध, पानी का पानी” होगा. महंत परमहंस रामचंद्र दास के योगदान को याद करते हुए योगी ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान संतों ने विषम परिस्थितियों में संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि संतों के तप और साधना का ही परिणाम है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का सपना साकार हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी सनातन परंपरा और अयोध्या के गौरव की रक्षा के लिए समाज की एकता सबसे महत्वपूर्ण है.