देश में E20 पेट्रोल पर बवाल जारी है. लोगों का आरोप है कि, बिना अध्ययन के सरकार ने उनपर इसे थोप दिया है. इस पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने की बात भी सामने आ रही है. इस बीच पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिलाया जा रहा है इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई. हालांकि, शीर्ष अदालत ने पेट्रोल पंपों को बेचे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल का प्रतिशत बताने और बिल में भी इथेनॉल का प्रतिशत लिखने का निर्देश देने की मांग पर सुनवाई से इनकार कर दिया. जस्टिस एमएम सुंदेश और पीबी वराले की बेंच ने यह फैसला किया.

याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने कहा कि रसीद देखिए, इसमें इथेनॉल का कोई जिक्र नहीं है. मुझे यह जानने का अधिकार है. गोस्वामी ने कहा कि पिछली बार अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि यह एक प्रयोग था. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि सरकार हलफनामे पर यह बात कहें. इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत सरकार उन्हें जवाब दे. गोस्वामी ने कहा कि मुझे नहीं, भारत के नागरिकों को. हमें यह जानने का अधिकार है कि हम क्या खरीद रहे हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कह दिया.

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिका में मांग की गई थी कि अधिकारियों को प्रत्येक पेट्रोल डिस्पेंसिंग नोजल पर इथेनॉल के सटीक प्रतिशत का खुलासा करने का निर्देश दिया जाए. इसमें यह निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि बेचे गए पेट्रोल में इथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से बताया जाए, चाहे वह ईंधन के प्रत्येक चालान, रसीद या बिल में ही क्यों न हो.

E20 के शुरू होते ही देश में बवाल

बता दें कि E20 पेट्रोल 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है. इसका मकसद कच्चे तेल का आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और देश में बने इथेनॉल मिले पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाना है. केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 2023 में कहा था कि, E20 के शुरू होते ही देश में पेट्रोल के दाम 50 रुपए से भी नीचे या जाएंगे. लेकिन इसके लागू होने के बाद जब दाम नहीं घटे तो कहा गया कि, इथेनॉल महंगा पद रहा है जिसे शुद्ध पेट्रोल खरीदना है वो 167 रुपए प्रति लीटर जाकर खरीद ले. इसी के बाद बवाल शुरू हो गया.

गाड़ियां होने लगी खराब

E20 पेट्रोल की वजह से ईंधन सिस्टम में जंग लगना, गाड़ी खराब होना या माइलेज कम होना, इस तरह की समस्या भी सामने आने लगीं. इसके बाद कार कंपनियों ने अब जल्दी-जल्दी E20 के साथ चलने वाली नई गाड़ियां बनाई हैं. मगर 2023 से पहले बेची गई पुरानी गाड़ियों की हालत को लेकर अभी भी सवाल हैं. हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक उपभोक्ता अदालत ने मारुति सुजुकी को आदेश दिया कि वह एक व्यक्ति को नई ग्रैंड विटारा कार दे, जिसमें E20 वाला इंजन हो. उस व्यक्ति की पुरानी कार कथित तौर पर E20 ईंधन से खराब हो गई थी. उनका कहना था कि बहुत से वाहन प्रेमी और विशेषज्ञ केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की आलोचना कर रहे हैं. सरकार ने लोगों को कम इथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल का विकल्प दिए बिना ही E20 थोप दिया है.

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