हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के महिला थाना से जुड़ा एक मामला अब सुर्खियों में है। दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज होने के करीब डेढ़ महीने बाद युवक राजीव राठौड़ ने कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने महिला थाना की सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है। परिजनों का आरोप है कि झूठे दहेज प्रकरण और मानसिक प्रताड़ना के कारण राजीव ने यह कदम उठाया। वहीं, सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पूरे मामले में पुलिस ने सिर्फ कानून के अनुसार कार्रवाई की।
परिजनों के आरोप- झूठे केस ने तोड़ दिया राजीव को
शिकायतकर्ता कमलेश राठौड़ ने पुलिस कमिश्नर को दिए आवेदन में बताया कि उनके छोटे भाई राजीव राठौड़ की शादी 1 दिसंबर 2025 को शिवानी राठौड़ से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शादी के कुछ समय बाद विवाद शुरू हो गया और पत्नी व उसके मायके पक्ष ने 50 लाख रुपये और संपत्ति की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर पूरे परिवार को झूठे दहेज प्रकरण में फंसाने और बदनाम करने की धमकियां दी गईं।
परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला थाना की सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार ने कथित रूप से 20 हजार रुपये की मांग की। उनका कहना है कि रकम नहीं देने पर दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कर दिया गया। परिवार का दावा है कि इसी केस और लगातार मानसिक दबाव के चलते 6 जुलाई 2026 को राजीव ने जहर खा लिया और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार ने बताया पूरा घटनाक्रम
मामले में Lalluram.com से बातचीत करते हुए सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे, निराधार और बेबुनियाद हैं। उन्होंने बताया कि 19 मई 2026 को महिला थाना में शिवानी राठौड़ ने अपने पति राजीव राठौड़ और ससुराल पक्ष के खिलाफ आवेदन दिया था। आवेदन में पति के किसी अन्य महिला से संबंध होने और ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
खुशबू परमार के अनुसार, आवेदन मिलने के बाद राजीव राठौड़ और अन्य संबंधित पक्षों को थाने बुलाया गया। वे दो दिन बाद उपस्थित हुए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच चर्चा कराई गई। इस दौरान दोनों पक्षों ने सामाजिक स्तर पर विवाद सुलझाने के लिए आठ दिन का समय मांगा, जिस पर पुलिस ने सहमति दी।
उन्होंने बताया कि बाद में अनावेदक पक्ष को दूसरा नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर थाने नहीं पहुंचे। आवेदन दिए जाने के 13 दिन बाद भी जब दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ और आवेदिका दोबारा थाने पहुंची, तब उसके आवेदन के आधार पर विधिसम्मत तरीके से एफआईआर दर्ज की गई।
‘समय देने के बदले पैसे मांगने का सवाल ही नहीं’
सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार ने स्पष्ट कहा कि 20 हजार रुपये मांगने का आरोप पूरी तरह झूठा है। उनका कहना है कि पुलिस ने दोनों पक्षों को पर्याप्त समय और अवसर दिया था ताकि विवाद आपसी सहमति से सुलझ सके। जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तभी कानून के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर के करीब डेढ़ महीने बाद हुई आत्महत्या
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महिला थाना में दर्ज मामले के करीब डेढ़ महीने बाद राजीव राठौड़ ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। इसके बाद परिजनों ने पुलिस कमिश्नर से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने, महिला थाना की कार्रवाई की समीक्षा करने और शिकायत में नामजद सभी लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल एक ओर मृतक का परिवार पुलिस कार्रवाई और एफआईआर को लेकर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरी ओर सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार अपनाई गई और रिश्वत मांगने का आरोप पूरी तरह निराधार है। ऐसे में इस मामले में वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
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