दिलशाद अहमद, सूरजपुर। सूरजपुर जिले से युवक की पिटाई के बाद मौत के सनसनीखेज मामले में एक नया मोड़ आया है। दरअसल, युवक को परिचित के घर से जबरन उठाकर बेरहमी से पीटा गया और बाद में सड़क किनारे फेंक दिया गया। गंभीर रूप से घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन सभी को 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यह पूरा मामला प्रतापपुर थाना क्षेत्र का है।

पुरानी रंजिश में आरोपियों ने वारदात को दिया अंजाम

जानकारी के अनुसार, प्रतापपुर थाना क्षेत्र के गोंदा गांव का रहने वाला हरिनंदन राजवाड़े गांव में ही एक परिचित के घर जाकर बैठा हुआ था। तभी केवरा के रहने वाले कुछ युवक आए और पुरानी मारपीट की रंजिश को लेकर हरिनंदन के साथ मारपीट करते हुए उसे अपने साथ ले गए और मारपीट करते हुए गांव से लगभग 5-6 किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिए।

इसको लेकर जिस घर में मारपीट की गई थी, उस घर की रहने वाली महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसके घर हरिनंदन आया हुआ था। तभी कुछ युवक वहां आ गए और उन्होंने हरिनंदन के साथ मारपीट की और मारपीट करते हुए उसे अपने साथ ले गए। जब इन लोगों ने पीछा किया तो युवकों द्वारा सत्तीपारा चौक में उसे फेंककर भाग गए। इसके बाद इन्होंने गंभीर रूप से घायल हरिनंदन को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

गिरफ्तार आरोपियों को मिली जमानत

वहीं इसको लेकर पुलिस ने कहा कि महिला की शिकायत पर हत्या का अपराध दर्ज किया गया था और मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है। इस दौरान न्यायालय की कार्यवाही देर रात तक चली।

पुलिस ने क्या कहा?

मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार देवांगन ने बताया कि घटना 23 जुलाई की है। हरिनंदन राजवाड़े अपने साथियों के साथ एक परिचित के घर जाकर रुका हुआ था। रात करीब 9 बजे आरोपी ललित राजवाड़े और उसके साथी घर में घुसकर गाली-गलौज और मारपीट करने लगे तथा हरिनंदन को अपने साथ ले गए। बाद में आरोपियों का पीछा करते हुए जब परिजन पहुंचे, तो हरिनंदन गंभीर हालत में सड़क किनारे पड़ा मिला। इसके बाद परिजनों ने उसे अस्पताल भिजवाया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। मामले में पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज किया है। मामले में प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की गई, जिनमें कुछ लोगों ने आरोपियों के नाम बताए। कुल मिलाकर मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रतापपुर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

अब ऐसे में हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जमानत मिलना कहीं न कहीं पुलिसिया कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करता है। वहीं इस मामले में परिजनों व प्रत्यक्षदर्शियों ने भी पुलिस और न्यायालय की कार्यवाही पर सवाल खड़े किए हैं और न्याय के लिए आगे का दरवाजा खटखटाने की बात कह रहे हैं।

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