गुजरात में नवरात्रि के त्योहार से ठीक पहले राजनीतिक तापमान एकाएक बढ़ गया है। बनासकांठा जिले के वडगाम से कांग्रेस के फायरब्रांड विधायक और प्रमुख दलित नेता जिग्नेश मेवाणी अपनी मां और बहन के खिलाफ बीजेपी नेता धवल दवे द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर उग्र प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

रविवार रात गांधीनगर के सेक्टर-21 पुलिस थाने में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब विधायक जिग्नेश मेवाणी एफआईआर की मांग को लेकर थाने की जमीन पर ही लेट गए। मेवाणी ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी को जिम्मेदार ठहराया। मेवाणी का आरोप है कि गृह विभाग के इशारे पर पुलिस आरोपी बीजेपी नेता का बचाव कर रही है और मामला दर्ज करने से बच रही है।

प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए मेवाणी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां पर की गई टिप्पणी पर पुलिस तुरंत एक्शन ले सकती है, तो एक दलित विधायक की मां-बहन के अपमान पर ढिलाई क्यों बरती जा रही है? स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब मेवाणी ने समर्थकों को सोमवार को गांधीनगर कूच करने का आह्वान किया। चूंकि गांधीनगर में नगर निगम चुनाव चल रहे हैं, इस कॉल से हड़कंप मच गया।

देर रात तक चले हाई- वोल्टेज ड्रामे के बाद जब पुलिस ने मामले की जांच के लिए सात दिनों का लिखित समय मांगा, तब जाकर मेवाणी ने अपना उपवास समाप्त किया। आरोप है कि बनासकांठा बीजेपी प्रभारी धवल दवे ने सोशल मीडिया पर बेहद अश्लील और अभद्र टिप्पणियां की थीं। इस घटना के बाद गांधीनगर, थराद, देत्रोज और बनासकांठा समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में दलित संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन दर्ज कराया है।

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