गुरुग्राम। पॉश सोसाइटी रिजवुड सिटी में रहने वाले सुरेंद्र मट्टू और उनकी पत्नी अनुराधा मट्टू ने अपने जवान बेटे सार्थक की मौत के मामले में पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पिता ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने उस तेज रफ्तार काले रंग की थार गाड़ी की फोटो खींच ली थी। उस फोटो में गाड़ी का नंबर बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा था। चश्मदीद ने वह नंबर तुरंत पुलिस को दे भी दिया था।
गाड़ी का नंबर मिलने के बाद भी देरी क्यों
सार्थक के माता-पिता का कहना है कि गाड़ी का पूरा नंबर हाथ में होने के बावजूद पुलिस को आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में 40 से 50 घंटे का लंबा समय लग गया। परिवार को बताया गया कि आरोपियों के शराब पीने की जांच के लिए खून के नमूने लिए गए हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसके तुरंत बाद ही आरोपियों को छोड़ दिया गया। आज वे दोनों आरोपी युवक खुलेआम बाहर घूम रहे हैं, जबकि हमारा बेटा हमेशा के लिए इस दुनिया से चला गया है।
एसीपी के सामने फूटा माता-पिता का दर्द
गुरुवार को वसंत कुंज जिले के बड़े पुलिस अधिकारी मट्टू दंपति से मिलने गुरुग्राम पहुंचे। उनके सामने पीड़ित माता-पिता ने अपना पूरा दर्द बयां किया और दिल्ली पुलिस की घोर लापरवाही की जानकारी दी। दुखी माता-पिता ने अब इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
ओवरटेक करने के चक्कर में ली सार्थक की जान
सुरेंद्र मट्टू ने बताया कि यह हादसा बेहद डरावना था। उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक काले रंग की थार कार करीब 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। कार का ड्राइवर सड़क पर आगे चल रहे किसी बड़े वाहन जैसे ट्रक या बस को गलत तरीके से पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान बाईं तरफ से आगे निकलने के चक्कर में कार अचानक उस रास्ते में घुस गई जहां सार्थक अपनी बाइक से जा रहा था। तेज रफ्तार कार ने सार्थक को ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि उसे संभलने का मौका ही नहीं मिला।
लहूलुहान छोड़कर भागे आरोपी, तड़पता रहा बेटा
पिता ने बताया कि टक्कर इतनी भयानक थी कि सार्थक दूर जाकर सड़क पर गिरा। आरोपी युवक उसे उसी हालत में खून से लथपथ छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए। उन्होंने कहा कि मैं खुद उस वक्त वहां मौजूद नहीं था, इसलिए हादसे के ठीक बाद क्या हुआ यह पूरी तरह नहीं बता सकता। लेकिन पुलिस हमें कई घंटों तक यहां-वहां घुमाती रही, जबकि इलाज न मिलने के कारण कुछ ही मिनटों में सार्थक की मौत हो चुकी थी।
36 घंटे तक क्या कर रही थी पुलिस
पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए सुरेंद्र मट्टू ने कहा कि 26 जून की रात को पुलिस ने फोन कर बताया कि आरोपी पकड़े गए हैं और हमें पहचान के लिए बुलाया। लेकिन जब हम वहां पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि अभी और समय लगेगा क्योंकि आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है। पीड़ित पिता का सवाल है कि 25 जून की सुबह से लेकर 26 जून की रात तक के इन 36 घंटों में पुलिस आखिर क्या कर रही थी।
काम पर नोएडा जा रहे थे सार्थक
सार्थक मट्टू 25 जून की सुबह छह बजे गुरुग्राम में अपने घर से निकले थे। जब वह दिल्ली की सीमा में दाखिल हुए तो रजोकरी फ्लाईओवर के पास इस हादसे का शिकार हो गए। टक्कर मारकर भागने के इस मामले में 34 साल के सार्थक की जान चली गई। वह एक बड़ी कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करते थे और उस दिन भी कंपनी के काम से नोएडा जा रहे थे।
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