अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक संयुक्त अभियान चलाकर ट्रेन से 15 बच्चों को मानव तस्करी से बचाया है। इन मासूमों को बहला-फुसलाकर फैक्ट्रियों में 12-12 घंटे काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था।
अंबाला। कैंट रेलवे स्टेशन पर देर रात ऐसा खुलासा हुआ जिसने सभी को चौंका दिया। सूचना मिली कि कुछ मासूम बच्चों को ट्रेन के जरिए कहीं दूर ले जाया जा रहा है, लेकिन वजह जानकर जांच टीम भी सन्न रह गई। रात के अंधेरे में शुरू हुए विशेष अभियान में एक-एक बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की गई और फिर जो सामने आया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए।
बताया गया कि बच्चों को बड़े सपने और मोटी कमाई का लालच देकर घरों से निकाला गया था। किसी को फैक्ट्री में नौकरी का भरोसा दिया गया, तो किसी को एडवांस रकम का झांसा। लेकिन पर्दे के पीछे कहानी कुछ और ही थी। देर रात रेलवे स्टेशन पर टीम ने ट्रेन पहुंचते ही कार्रवाई की और कई बच्चों को अपने साथ लिया।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब Just Rights for Children Alliance के टोल फ्री नंबर पर सूचना मिली।
जानकारी के बाद अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर संयुक्त टीम ने ट्रेन संख्या 15211 जननायक एक्सप्रेस में विशेष चेकिंग अभियान चलाया और 15 बच्चों को रेस्क्यू किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चों को पंजाब, अंबाला और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मजदूरी के लिए भेजा जा रहा था।
पूछताछ में पता चला कि कुछ बच्चों को अंबाला की फाइबर फैक्ट्री में धागा बनाने, जबकि कुछ को जालंधर की जीरा फैक्ट्री में काम पर लगाने की तैयारी थी। बच्चों को दो हजार रुपये एडवांस और 12 हजार रुपये तनख्वाह देने का लालच दिया गया था। साथ ही सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक काम करवाने की बात सामने आई। रेस्क्यू के बाद बच्चों की काउंसिलिंग कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण में भेजा गया।
डीडीआर और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी बच्चों को Child Welfare Committee Ambala के समक्ष पेश किया गया। अभियान में आरपीएफ, मानव तस्करी निरोधक इकाई और जिला युवा विकास संगठन की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।

