संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य सरकार ने निजीकरण की तरफ कदम बढ़ाया है। प्रदेश के रीवा, देवास और गुना तीन जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया है। वहीं इस पर कांग्रेस पार्टी ने जमकर निशाना साधा हैं।
एमपी के तीन जिलों रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में दिया जाएगा। यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि यह अभी सरकार का पायलट प्रोजेक्ट है। सरकार का मानना है कि इससे चिकित्सा सुविधाओं के प्रबंधन, विशेषज्ञ सेवा की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
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सरकार इसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया सुधारात्मक कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे आत्मसमर्पण बता रही है। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा कि पीपीपी मोड पर तीन जिलों से 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिए जा रहा है, जो निजी स्वास्थ्य माफिया है उनके सामने यह समर्पण है। भारतीय जनता पार्टी के शासन में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है अंतिम सांसे गिन रही है।

