अनमोल मिश्रा, सतना। सतना जिले से एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। सतना के स्थानीय निवासियों को सुगम और आधुनिक परिवहन सुविधा देने के लिए शासन की ओर से आवंटित की गई 20 इलेक्ट्रिक बसों को कथित तौर पर इंदौर, भोपाल और अन्य महानगरों में ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। इस गंभीर विषय को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने सतना जिला कलेक्टर को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

बता दें कि शासन की ओर से सतना जिले के लिए कुल 20 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई थीं। इन बसों का मुख्य उद्देश्य सतनावासियों को प्रदूषण मुक्त और सुगम यातायात की सुविधा प्रदान करना था। लेकिन अब यह बात सामने आई है कि इन बसों को सतना में चलाने के बजाय कथित तौर पर इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में भेज दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिले में इन बसों का संचालन न होना सतना की जनता के साथ सरासर नाइंसाफी और धोखा है।

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कांग्रेस ने उठाए सवाल

कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में कांग्रेस ने सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि स्मार्ट सिटी से लेकर एयरोड्रम, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर तक के तमाम विषयों पर सरकार की तरफ से धोखा किया जा रहा है? आखिर सत्ता पक्ष के हमारे मंत्री, सांसद, महापौर और कमिश्नर कर क्या रहे हैं? नेताओं का आरोप है कि सतना के विकास के लिए आने वाली बड़ी परियोजनाएं या तो कागजों में सिमट कर रह जाती हैं या फिर उन्हें दूसरे बड़े शहरों की तरफ मोड़ दिया जाता है।

बसों को वापस लाने की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर से कांग्रेस ने सतना जिले के हिस्से की सभी 20 इलेक्ट्रिक बसों की वर्तमान स्थिति की जांच कर उन्हें तुरंत सतना वापस लाए जाने की मांग की है। इस बात का पता लगाया जाए कि आखिर किन नियमों और किस आधार पर इन बसों को अन्य शहरों में स्थानांतरित किया गया।

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सतना की जनता को मिलेगा हक ?

इस खबर के बाहर आते ही स्थानीय सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सतना को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर के हक की बुनियादी सुविधाएं भी छीन ली जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर इस संवेदनशील और जनहित के मुद्दे पर क्या त्वरित संज्ञान लेते हैं और क्या सतना की जनता को उनके हक की इलेक्ट्रिक बसें वापस मिल पाती हैं।

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