संजय पाटीदार, भोपाल। जिन सरकारी शिक्षकों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं और जो बच्चों को शिक्षा देने के लिए नियुक्त किए गए थे, वे वर्षों से सरकारी दफ्तरों और विधायकों के यहां अटैच थे। मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षकों की भारी कमी के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब बच्चों की पढ़ाई छोड़कर कई वर्षों से सरकारी दफ्तरों और जनप्रतिनिधियों के यहां अटैच चल रहे शिक्षकों की घर वापसी होगी।

शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त

अब प्रदेश में शिक्षकों की कमी और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहे असर को देखते हुए डीपीआई ने विधायकों के निजी सहायक और विभिन्न विभागों में पदस्थ 213 शिक्षकों की अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें वापस स्कूलों में भेजने का फैसला लिया है। अब ये शिक्षक फिर से स्कूलों में लौटेंगे, ताकि बच्चों को समय पर पढ़ाई और बेहतर शिक्षा मिल सके…मुद्दा उठा ओर अब इस पर सियायत भी तेज हो गई है।

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कांग्रेसः शिक्षा में सुधार नहीं आएगा

कांग्रेस का आरोप है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है और स्कूल बंद हो रहे हैं। आनंद जाट, कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि कुछ शिक्षकों के अटैचमेंट खत्म करने से शिक्षा में सुधार नहीं आएगा, मध्यप्रदेश में हर रोज 6 स्कूल बंद हो रहे हैं।

भविष्य में और भी नवाचार

कांग्रेस सरकार में शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त थी शिक्षकों का शोषण होता था। भाजपा प्रवक्ता अजय यादव ने कहा- भाजपा शिक्षा व्यवस्था के लिए और भी नवाचार भविष्य में करेगी।

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