वीरेंद्र कुमार, नालंदा। विश्व प्रसिद्ध नालंदा यूनिवर्सिटी में तीसरे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जहां ज्ञान, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस गरिमामयी समारोह में देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा रहे, जबकि अध्यक्षता बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने की।
14 देशों के 219 छात्रों को मिला स्वर्ण पदक
इस वर्ष विश्वविद्यालय के 14 देशों के कुल 219 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय के इतिहास में पिछले 11 वर्षों का यह सबसे बड़ा बैच माना जा रहा है। समारोह के दौरान परिसर में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और भारतीय विरासत की अनूठी झलक देखने को मिली।
2026 से शुरू होगा नया कोर्स
कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि नालंदा का स्थापना चरण अब पूरा हो चुका है और अब विश्वविद्यालय वैश्विक बौद्धिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन विकास भी, विरासत भी का उल्लेख करते हुए घोषणा की कि अगस्त 2026 से विश्वविद्यालय में नया कोर्स नालंदा स्पिरिट शुरू किया जाएगा।
बनकर तैयार हो रहा नया पुस्तकालय भवन
इसके साथ ही नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति अध्ययन से जुड़े नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। समारोह में आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय पर विशेष चर्चा हुई। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय का नया पुस्तकालय भवन बनकर तैयार हो रहा है, जिसमें प्राचीन पांडुलिपियों के लिए विशेष सेक्शन बनाया गया है।
ज्ञान भारतम परियोजना के तहत इन पांडुलिपियों को समझने और डिकोड करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाएगा। साथ ही हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक विकास पर भी शोध शुरू किया गया है।
मुख्य अतिथि डॉ. पीके मिश्रा ने अपने संबोधन में रिस्पॉन्सिबल नॉलेज विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि डिजिटल युग में सूचनाओं की बाढ़ तो है, लेकिन विवेक की कमी दिखाई दे रही।
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