समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख अखिलेश यादव 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे हैं लेकिन इन तैयारियों के बीच उनके ही कार्यकर्ता उनके लिए सिरदर्द बने हुए हैं। हाल के दिनों में सपा नेताओं की तरफ से कुछ ऐसे बयान सामने आए हैं जो अखिलेश यादव की सत्ता वापसी के मंसूबों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
बार-बार दी संयम बरतने की सलाह
सपा नेताओं के अनियंत्रित बयानबाजी के चलते अब अखिलेश यादव अपने ही कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की नसीहत दे रहे हैं। पार्टी की तरफ से पहले एक प्रेस रिलीज जारी की गई, जिसमें सपा कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार पर नियंत्रण रखने को कहा गया। वहीं इसके कुछ दिन बाद एक अखबार के कार्यक्रम में भी अखिलेश यादव ने यही बात दोहराई और अपने कार्यकर्ताओं को संयम रखने के लिए कहा।
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बिगड़े बोल फेर ना दें अखिलेश के मंसूबों पर पानी
दरअसल अखिलेश यादव एक तरफ PDA और जातीय समीकरण की राजनीति से सपा के लिए माहौल बनाने में लगे हैं लेकिन दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के कई ऐसे नेता हैं जो समय-समय पर विवादित बयान देकर उनकी मंसूबों पर पानी फेरते दिख रहे हैं। इसमें सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी अपने बयानों से ज्यादा चर्चा में रहे। ब्राह्मणों पर की गई अमर्यादित टिप्पणी के बाद उन्होंने माफी तो मांगी ली लेकिन उसके बाद ही उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें उन्होंने जाट और गुर्जर समुदाय के लिए अपमानजनक बयान दिया। भाटी ने कहा कि केवल जाट और गुर्जर समुदाय ही ऐसे होते हैं जिनमें एक पत्नी के कई पति होते हैं। भाटी के बयान के बाद उनका व्यापक विरोध शुरू हो गया।
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‘संयम की पाठशाला’ में व्यस्त अखिलेश यादव
अब अखिलेश यादव जिस तरह से बार-बार अपने कार्यकर्ताओं को संयमित रहने के लिए कह रहे हैं उससे उनकी चुनावी तैयारियों को झटका लगता दिख रहा है। अखिलेश यादव अपनी चुनावी तैयारियों से ज्यादा इन दिनों ‘संयम की पाठशाला’ में ही व्यस्त हैं। क्योंकि ब्राह्मणों को लेकर सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी का विवादित बयान और सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी का पीएम नरेंद्र मोदी को गाली देना और अति उत्साह में सपा कार्यकर्ताओं का आक्रामक रवैया पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।

