दिल्ली में हाल के दिनों में आग की घटनाओं के बाद फायर सेफ्टी ( fire safety) को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। खासकर उन इमारतों पर नजर बढ़ाई गई है जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं, जैसे अस्पताल, होटल, नर्सिंग होम और रेस्टोरेंट। इसी क्रम में दिल्ली फायर विभाग (Delhi Fire Service) ने राजधानी की करीब 450 कमर्शियल बिल्डिंगों को असुरक्षित चिह्नित किया है। विभाग के अनुसार इन इमारतों में या तो अनिवार्य फायर एनओसी (No Objection Certificate) मौजूद नहीं है, या फिर निर्माण के दौरान तय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इन भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम की कमी गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि किसी भी आपात स्थिति में बड़े हादसे का खतरा बढ़ सकता है। विभाग अब ऐसे सभी भवनों की विस्तृत जांच कर रहा है और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एक्शन
दिल्ली में मालवीय नगर होटल में आग की घटना के बाद पूरे शहर में फायर सेफ्टी को लेकर बड़ा सर्वे किया गया है। इस दौरान कई इमारतों में सुरक्षा मानकों की स्थिति की जांच की गई और उन बिल्डिंग्स की पहचान की गई, जहां नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा था। यह कार्रवाई उस गंभीर हादसे के बाद तेज की गई जिसमें मालवीय नगर के एक होटल में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि होटल में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी की जा रही थी और जरूरी सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे। घटना के बाद प्रशासन ने राजधानी में होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक भवनों की फायर सेफ्टी जांच तेज कर दी है। जिन जगहों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां सुधारात्मक कार्रवाई और नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
दिल्ली सरकार के निर्देश पर बनी कमेटी
दिल्ली सरकार द्वारा गठित जिला-स्तरीय और सब-डिवीजन कमेटियों ने शहरभर में जांच अभियान चलाया। इस सर्वे में करीब 450 ऐसी इमारतें चिन्हित की गई हैं जिन्हें असुरक्षित माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन इमारतों में होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, गेस्ट हाउस, अस्पताल और नर्सिंग होम जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कई जगहों पर या तो फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया गया है या भवन निर्माण मानकों का उल्लंघन हुआ है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह सर्वे 3 जून की घटना के बाद तेज किया गया था, जिसके बाद शहरभर में ऐसी इमारतों की पहचान का निर्देश दिया गया था जो सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही हैं। इस काम के लिए कुल 13 जिला स्तरीय कमेटियां और 39 सब-डिवीजन स्तर की कमेटियां बनाई गई हैं। यह सर्वे अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में और भी इमारतों की जांच की जाएगी।
विभागों की ओर से नोटिस जारी
विभाग ने संबंधित भवनों से स्ट्रक्चरल लेआउट प्लान भी तलब किया है, ताकि यह जांचा जा सके कि निर्माण वास्तविक स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ है या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, अगर लेआउट प्लान और फायर एनओसी (No Objection Certificate) के लिए पहले जमा किए गए दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है, तो मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट रद्द किए जा सकते हैं। फायर विभाग ने साफ किया है कि नई एनओसी तभी जारी की जाएगी जब भवन पूरी तरह से निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करेगा। इसके साथ ही नियमों के अनुरूप सुधार न करने वाली इमारतों पर आगे और कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
पालम अग्निकांड ने झकझोरा
मार्च में पालम इलाके में हुई दर्दनाक आग की घटना के बाद राजधानी में फायर सेफ्टी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। उस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। बताया जाता है कि परिवार के कुछ सदस्य उस समय गोवा गए हुए थे, वरना हादसा और भी बड़ा हो सकता था। इस तरह की घटनाओं को देखते हुए अब दिल्ली सरकार ने फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है। प्रशासन का मानना है कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसी वजह से राजधानी में व्यावसायिक और रिहायशी दोनों तरह की इमारतों की जांच तेज कर दी गई है। होटल, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष फोकस रखा जा रहा है, ताकि फायर सेफ्टी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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