दिल्ली के लगभग 75 % हिस्से को ‘हीट स्ट्रेस’ (Heat Stress) की चपेट में है। यह दावा भू-सतह तापमान (Land Surface Temperature – LST) के आधार पर तैयार एक रिपोर्ट में किया गया है। दिल्ली के बड़े हिस्से में सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है, जिससे शहर में गर्मी का दबाव बढ़ रहा है और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव (Urban Heat Island Effect) भी तेज हो रहा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ इलाके अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं। इनमें लुटियन दिल्ली, दिल्ली कैंट और सिविल लाइंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां हरियाली और कम घनी आबादी के कारण तापमान तुलनात्मक रूप से कम पाया गया है।

दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रही है। सुबह से निकलने वाली तेज धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के बीच शहर के कई इलाके ‘हीट स्ट्रेस’ की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (CSE) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के ज्यादातर घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके, अव्यवस्थित तरीके से बसी कॉलोनियां और औद्योगिक क्षेत्र अत्यधिक गर्मी की चपेट में आने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन इलाकों में हरियाली बेहद कम है और जलाशयों या पानी वाले क्षेत्रों की संख्या भी नगण्य है। ऐसे में सीमेंट-कंक्रीट से बनी इमारतें, सड़कें और अन्य ढांचागत संरचनाएं दिनभर सूरज की गर्मी को अपने भीतर सोख लेती हैं। शाम और रात के समय यही संरचनाएं गर्मी छोड़ती रहती हैं, जिससे पूरा इलाका भट्टी की तरह तपने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही स्थिति ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ को बढ़ाती है, जिसमें शहर के घने और कंक्रीट वाले हिस्सों का तापमान आसपास के अपेक्षाकृत हरित क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक हो जाता है।

इन निगम वार्डों का 90% हिस्सा तप रहा

‘हीट स्ट्रेस’ को लेकर जारी रिपोर्ट में कई ऐसे निगम वार्डों की पहचान की गई है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अत्यधिक गर्मी की चपेट में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन इलाकों में रहने वाले लोगों को भीषण तापमान और गर्म वातावरण का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में जिन निगम वार्डों को सबसे ज्यादा प्रभावित बताया गया है, उनमें बुध विहार, किराड़ी सुलेमान नगर, प्रेम नगर, सैद-उल-अजाब, करावल नगर वेस्ट, महावीर एंक्लेव, नीलोठी, शिव विहार, प्रताप विहार और मुस्तफाबाद जैसे इलाके शामिल हैं।

ऐसे किया विश्लेषण

सैटेलाइट तस्वीरों और भू-सतह तापमान (Land Surface Temperature-LST) डेटा के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 98 प्रतिशत हिस्से में किसी न किसी समय तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी का लगभग 75.78 प्रतिशत क्षेत्र पिछले छह वर्षों से लगातार हीट स्ट्रेस की मार झेल रहा है। अध्ययन में उन इलाकों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है, जहां लगातार छह साल तक तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में समय के साथ ग्रीन कवर और जलाशयों का क्षेत्र घटा है, जिससे शहर में गर्मी का प्रभाव और अधिक बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हरित क्षेत्रों और जल निकायों में कमी के कारण सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव अधिक गंभीर होता जा रहा है।

राहत वाले इलाके

दिल्ली में बढ़ते हीट स्ट्रेस के बीच कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां तापमान का प्रभाव अपेक्षाकृत कम पाया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों और भू-सतह तापमान (LST) डेटा पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, लुटियंस दिल्ली, दिल्ली छावनी परिषद और सिविल लाइंस जैसे हरियाली वाले क्षेत्रों में हीट स्ट्रेस कम दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन इलाकों में योजनाबद्ध निर्माण, चौड़ी सड़कें, पर्याप्त हरित क्षेत्र और घने पेड़-पौधों की मौजूदगी के कारण गर्मी कम अवशोषित होती है। इसके अलावा मॉडल टाउन, रोहिणी, वसंत विहार, हौज खास और मयूर विहार जैसे क्षेत्रों में भी हीट स्ट्रेस का असर तुलनात्मक रूप से कम पाया गया।

विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (CSE) के सस्टेनेबल हैबिटेट प्रोग्राम के प्रोग्राम डायरेक्टर रजनीश सरीन ने कहा कि शहर में हरियाली और जलाशयों का विस्तार करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, दिल्ली को अधिक योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए जाने की आवश्यकता है ताकि बढ़ती गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि भवन निर्माण में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए जो कम गर्मी अवशोषित करे। साथ ही इमारतों की छतों को भी इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे न्यूनतम गर्मी सोखें।

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