कुमार इंदर, जबलपुर। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए विकास कार्य प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ रहे हैं। जबलपुर में शहरवासियों की सेहत और सुंदरता को ध्यान में रखकर 9 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया 6 किलोमीटर लंबा नॉन-मोटराइज्ड ट्रैक (NMT) आज पूरी तरह बदहाल हो चुका है। देखरेख के अभाव में जहां 2 करोड़ रुपये की कीमती सजावटी ‘पोस्ट टॉप लाइटिंग’ चोरी हो चुकी है, वहीं पूरा ट्रैक अवैध कब्जे और पार्किंग ज़ोन में तब्दील हो गया है।
सेहत और सुरक्षा के लिए बना था 6 किमी लंबा कॉरिडोर
देश के प्रमुख शहरों जैसे पुणे और चेन्नई की तर्ज पर जबलपुर में भी पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित गलियारा प्रदान करने के उद्देश्य से 6 किलोमीटर का NMT कॉरिडोर बनाया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण घटाना और लोगों को सुरक्षित वॉकिंग व साइकिलिंग ट्रैक उपलब्ध कराना था, लेकिन अब इसका नामोनिशान मिटता नजर आ रहा है।
2 करोड़ की लाइटें पार, दुकानदारों का अवैध कब्जा
उचित सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण असामाजिक तत्वों ने ट्रैक पर लगी 2 करोड़ रुपये की आधुनिक और सजावटी ‘पोस्ट टॉप लाइटिंग’ पार कर दी। इसके अलावा, स्थानीय दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों ने पूरे पाथवे पर अवैध कब्जा जमा लिया है। जो ट्रैक आम नागरिकों के चलने के लिए बना था, वहां अब गाड़ियां पार्क हो रही हैं और दुकानें सज रही हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन द्वारा निर्माण के बाद नियमित मॉनिटरिंग और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई न किए जाने से यह नागरिक सुविधा पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इस तरह से सरकारी बजट की बर्बादी और लचर कानून व्यवस्था को लेकर अब स्थानीय जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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