दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुए तरुण हत्याकांड (Tarun Murder Case) में नया मोड़ सामने आया है। प्रशासन ने मामले में आरोपी बनाए गए एक नाबालिग के जन्म पंजीकरण दस्तावेज (बर्थ सर्टिफिकेट) को रद्द कर दिया है। गुरुवार को जारी एक प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने मार्च 2026 में हुई तरुण बुटोलिया की हत्या के आरोपियों में से एक के जन्म पंजीकरण दस्तावेज को निरस्त किया है। तरुण बुटोलिया की हत्या के बाद पश्चिमी दिल्ली में कई दिनों तक सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी रही थी।

फैजान को नाबालिग बताने वाला दस्तावेज रद्द

नाबालिग आरोपी के बर्थ सर्टिफिकेट को रद्द किया जाना इस मामले में इसलिए अहम है, क्योंकि इसी दस्तावेज में आरोपी फैजान की उम्र नाबालिग बताई गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद उसकी उम्र नाबालिग साबित करने के लिए इस दस्तावेज पर भरोसा नहीं किया जा सकेगा। जानकारी के अनुसार, विकासपुरी के एसडीएम ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को पत्र लिखकर बर्थ सर्टिफिकेट रद्द करने को कहा था। यह कार्रवाई राजस्व विभाग की जांच के बाद हुई। जांच में आरोपी के देर से किए गए जन्म पंजीकरण से जुड़ा आदेश अमान्य पाया गया था। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित जन्म प्रमाणपत्र को रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

आरोपी के पास दो बर्थ सर्टिफिकेट और दो आधार कार्ड होने का दावा

वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के एक अधिकारी के मुताबिक, आरोपी के पास दो बर्थ सर्टिफिकेट और दो आधार कार्ड थे। इनमें से एक बर्थ सर्टिफिकेट में उसे नाबालिग बताया गया था। अधिकारी के अनुसार, जांच-पड़ताल के बाद नगर निगम को बताया गया कि आरोपी को नाबालिग दर्शाने वाला बर्थ सर्टिफिकेट मान्य नहीं था। इस संबंध में नगर निगम से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। रद्द किए गए जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड में आरोपी की जन्म तिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज थी। अब इस रिकॉर्ड के निरस्त होने के बाद आरोपी की उम्र तय करने के लिए अन्य वैध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच अहम होगी।

प्रशासनिक जांच में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश अमान्य मिला

विकासपुरी के एसडीएम के हस्ताक्षर वाला पत्र दिल्ली नगर निगम (MCD) के वेस्ट जोन के रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) को भेजा गया था। अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासनिक जांच में आरोपी के जन्म के देर से हुए पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच में निष्कर्ष निकला कि जिस आदेश के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया था, वह अमान्य था। इसी आधार पर संबंधित जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड को रद्द करने की कार्रवाई की गई। यह मामला 4 मार्च 2026 को तरुण बुटोलिया की हत्या से जुड़ा है।

रंगीन पानी का गुब्बारा गिरने के बाद शुरू हुआ था विवाद

पुलिस के मुताबिक, विवाद उस समय शुरू हुआ जब बुटोलिया के परिवार की एक नाबालिग लड़की होली खेल रही थी। उसने छत से रंगीन पानी का गुब्बारा फेंका, जो एक महिला पर जा गिरा और उसके कपड़ों पर रंग के छींटे पड़ गए। मई में दाखिल दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, इसके बाद जाति-आधारित कथित अपशब्दों को लेकर विवाद बढ़ गया। पुलिस के आरोपपत्र के मुताबिक, बाद में यही विवाद तरुण बुटोलिया की हत्या में बदल गया।  पुलिस ने इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया है। आरोपियों पर गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा होने का आरोप भी लगाया गया है।

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