BJP vs Congress on CEC Gyanesh Kumar: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) में मतभेद पर खुलासे के बाद से देश की राजनीति में कोहराम मचा हुआ है। पूरा विपक्ष इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ( CEC Gyanesh Kumar) पर हमलावर है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है। ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने 25 सितंबर को पूरे देश में प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतिम वॉर्निंग दी है। वहीं अब बीजेपी सीईसी ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतर गई है। लिहाजा चुनाव आयोग घमासान पर अब बीजेपी Vs कांग्रेस (विपक्ष) का मुकाबला हो गया। सीईसी ज्ञानेश कुमार के बचाव और विपक्ष को घेरने के लिए भाजपा ने मुख्यमंत्रियों की फौज उतार दी है। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ, असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस से लेकर दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता तक को मैदान में उतार दिया है।

सभी बीजेपी शासित राज्यों के सीएम ताबड़तोड़ रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीईसी ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रहे हैं। जबकि कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साध रहे हैं। सभी कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने, लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं।

चुनाव आयोग पर कांग्रेस को जवाब देने के लिए इन मुख्यमंत्रियों (योगी आदित्यनाथ, हिमंता बिस्वा सरमा, पुष्कर सिंह धामी और देवेंद्र फडणवीस) ने सीधे तौर पर राहुल गांधी के बयानों और कांग्रेस की राजनीति को आड़े हाथों लिया। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एसआईआर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि SIR पर विपक्ष ने भ्रम फैलाया। यह लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस, सपा, आरजेडी सब हायतौबा मचा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले भी एसआईआर हुआ है। विपक्ष के लोग हार पर चुनाव आयोग को दोष देते हैं और जीतने पर कुछ नहीं बोलते। सीएम योगी ने आगे कहा कि कांग्रेस जैसी पार्टी, जिसने देश में सबसे लंबे समय तक शासन किया। वह लगातार चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस भारत की हर संस्था को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करती है।

राहुल गांधी को भारत की जनता से माफी मांगनी चाहिए- CM सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को भारत की जनता से माफी मांगनी चाहिए। आपने बार-बार चुनाव आयोग पर हमला किया और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले फैसले लिए लेकिन कल चुनाव आयोग ने साफ बता दिया कि सभी फैसले सबकी सहमति से लिए गए थे फिर आपने लोगों के दिमाग में गलत बातें क्यों डालीं? आपका आधार क्या था? चुनाव आयोग पर हमला क्यों किया?सरमा ने आगे कहा कि राहुल गांधी एक के बाद एक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं। ज्ञानेश कुमार से पहले भी वे 90 चुनाव हार चुके हैं। उनकी क्या साख बची है?

CM रेखा गुप्ता बोलीं- राहुल गांधी पर देशद्रोह का केस हो

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) के आयुक्तों में मतभेद की खबरों और इसे लेकर विपक्ष के आरोपों पर दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया सामने आई है। सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ आरोप और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर तीखा हमला बोला है। रेखा गुप्ता ने इसे जनता को गुमराह करने का प्रोपेगैंडा करार दिया। उन्होंने राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं पर देश की संस्थाओं को बदनाम करने और जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। रेखा गुप्ता ने उनके खिलाफ ‘देशद्रोह’ का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

वोट चोरी नहीं हुई, राहुल गांधी का दिमाग चोरी हुआ- देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। कोई वोट चोरी नहीं हुई, राहुल गांधी का दिमाग चोरी हुआ है। मैं प्रधानमंत्री जी से विनती करता हूं कि कोई कमेटी बनाएं, जो राहुल गांधी का दिमाग ढूंढ के दे दे।

कांग्रेस पार्टी पूरी तरह बिखर चुकी है- CM पुष्कर सिंह धामी

जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीईसी विवाद पर कहा कि लोकतंत्र में सवाल तो पूछे ही जाने चाहिए लेकिन किसी अंदरूनी नोट को अंतिम फैसला या किसी आपत्ति को संस्थागत विफलता बताने से पहले पूरा रिकॉर्ड सामने रखा जाना चाहिए। लोकतांत्रिक फैसले लेने की प्रक्रिया में अंदरूनी विचार-विमर्श एक अहम हिस्सा होता है। सीएम धामी ने आगे कहा कि सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और संवैधानिक प्रक्रियाओं से मिलने चाहिए। इसका मकसद सिर्फ कोई एजेंडा आगे बढ़ाना या संस्थाओं को बदनाम करना नहीं होना चाहिए।

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