Business Desk – Brent Crude Near $100 : अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने लगा है और इसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। बाजार में अब सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि अगर तनाव लंबा खिंचा और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, तो कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार जा सकता है।

आज कितने पर पहुंचा कच्चा तेल?

2 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। WTI क्रूड भी करीब 90.66 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट करीब छह सप्ताह के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। पिछले कुछ सत्रों में तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है।

तेल बाजार के लिए Strait of Hormuz बेहद अहम है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही में बड़ी रुकावट आती है तो दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान के बीच फिर क्यों बढ़ा तनाव?

अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ताजा संघर्ष में होर्मुज के आसपास समुद्री आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान की एयर डिफेंस, रडार और समुद्री गतिविधियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इस तनाव का असर सीधे Oil Market पर पड़ा है। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर संघर्ष बढ़ता है तो तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से कच्चे तेल में Risk Premium बढ़ रहा है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है परेशानी?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश के Import Bill पर पड़ता है। अगर ब्रेंट क्रूड लगातार ऊपर जाता है तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है।

इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। महंगा क्रूड यानी पेट्रोल-डीजल और दूसरे ईंधनों की लागत बढ़ने का दबाव। इससे Transport Cost बढ़ सकती है और माल ढुलाई महंगी होने पर रोजमर्रा की कई चीजों के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।

महंगा तेल यानी महंगाई का दबाव

कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से कई सेक्टर की लागत बढ़ती है। इसका असर कंपनियों के मार्जिन से लेकर आम आदमी के घरेलू बजट तक दिखाई दे सकता है।

यही वजह है कि दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव और Strait of Hormuz की स्थिति पर है। अगर इलाके में तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य रहती है तो कीमतों पर दबाव घट सकता है। लेकिन संघर्ष लंबा खिंचता है और सप्लाई बाधित होती है, तो Brent Crude के 100 डॉलर के पार जाने का खतरा फिर बढ़ सकता है।