राजधानी दिल्ली में विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली नगर निगम (MCD) से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने नगर निगम आयुक्त के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब वे अपने स्तर पर ही 50 करोड़ रुपये तक की योजनाओं और विकास कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। अब तक बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अलग-अलग स्तरों पर स्वीकृति की प्रक्रिया के चलते फैसलों में देरी होती थी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से फाइलों का बोझ कम होगा, प्रशासनिक प्रक्रिया सरल बनेगी और सड़कों, नालों, पार्कों, स्ट्रीटलाइट, स्कूल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम समय पर पूरे हो सकेंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम खास तौर पर उन परियोजनाओं के लिए अहम है जो स्थानीय जरूरतों से सीधे जुड़ी होती हैं, लेकिन मंजूरी में देरी के कारण लंबे समय तक अटकी रहती थीं। अब निगम आयुक्त सीधे निर्णय लेकर काम शुरू करा सकेंगे। दिल्ली सरकार का कहना है कि यह फैसला निगम प्रशासन को अधिक सक्षम और जवाबदेह बनाएगा। साथ ही, विकास कार्यों की गति बढ़ने से दिल्लीवासियों को ज़मीनी स्तर पर जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, इस फैसले से न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज़ होगी, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकेंगे, जिससे जनता को शीघ्र लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के समग्र विकास के लिए स्थानीय निकायों को सशक्त करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने इसे जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया एक दूरदर्शी प्रशासनिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय का सीधा लाभ राजधानी की जनता को मिलेगा, क्योंकि इसके बाद सड़कों, नालों, सफाई व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़े कार्य पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पूरे होंगे।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी, जिससे नागरिकों को रोज़मर्रा के जीवन में होने वाली असुविधाओं से राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन से संसाधनों का बेहतर और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
लटकी परियोजनाओं में आएगी तेजी
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम में कई अहम विकास परियोजनाएं केवल इसलिए अटकी हुई थीं क्योंकि 5 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के कारण उन्हें बहुस्तरीय प्रशासनिक मंजूरी की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे फैसले में अनावश्यक देरी होती थी। हालांकि, दिल्ली सरकार द्वारा निगम आयुक्त के वित्तीय अधिकार बढ़ाए जाने के बाद अब ऐसी परियोजनाओं को सीधे और तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इससे न केवल निर्णय प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि वर्षों से लंबित पड़े कार्यों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
इतिहास में पहली बार इतनी राशि की मंजूरी मिली
पूर्ववर्ती उत्तरी और पूर्वी नगर निगम के प्रेस एवं सूचना विभाग के पूर्व निदेशक योगेंद्र सिंह मान ने कहा कि दिल्ली नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है जब निगम आयुक्त को 50 करोड़ रुपये तक के फंड से जुड़े प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से निगम के विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आएगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगने वाला समय काफी हद तक कम होगा।
क्या बदलेगा? जानिए फैसले के 5 बड़े असर
तेज़ मंजूरी प्रक्रिया
अब 5 करोड़ से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को निगम आयुक्त अपने स्तर पर स्वीकृत कर सकेंगे। इससे छोटे-मध्यम प्रोजेक्ट्स की शुरुआत और पूरा होने की रफ्तार बढ़ेगी।
डीपीआर पर सीधे फैसला
निगम के अधिकारी 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स की डीपीआर तैयार कर उसे सीधे आयुक्त से मंजूरी दिला सकेंगे, जिससे फाइलें महीनों तक अटकी नहीं रहेंगी।
जोनों में विकास को रफ्तार
विभिन्न वार्डों, मध्य जोन और अन्य जोनों में अपशिष्ट प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था के नवीनीकरण जैसे कार्यों में तेजी आएगी।
राजनीतिक मंजूरी की बाधा खत्म
अब तक 5 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स के लिए स्थायी समिति और सदन की मंजूरी जरूरी थी। नए फैसले से यह प्रक्रिया सरल होगी और कीमती समय बचेगा।
स्कूल और बुनियादी सेवाओं को प्राथमिकता
निगम के सभी जोनों में स्कूल, सड़क, नाले, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को अब तेजी से मंजूरी देकर जल्द शुरू किया जा सकेगा।
देशभर में नगर निकायों के आयुक्तों के वित्तीय अधिकार
मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) आयुक्त को 2.5 करोड़ रुपये तक के फंड से जुड़े प्रोजेक्ट्स स्वीकृत करने का अधिकार।
बेंगलुरु: निगम आयुक्त को 3 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने की शक्ति।
हैदराबाद: निगम आयुक्त को 20 लाख रुपये तक के फंड स्वीकृत करने की अनुमति।
चेन्नई: निगम आयुक्त 30 लाख रुपये तक की राशि के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे सकते हैं।
चंडीगढ़: निगम आयुक्त को 50 लाख रुपये तक के फंड स्वीकृत करने का अधिकार।
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