रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश को देश की “ऊर्जा राजधानी” बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. ऊर्जा उत्पादन क्षमता को दोगुना करने और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है.

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पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा को लेकर दिन प्रतिदिन तेज होती बहस के बीच राज्य सरकार पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम कर नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है. सरकार की मंशा का विभागीय सचिव आईएएस डॉ. राहुल यादव ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए भविष्य का ब्लूप्रिंट पेश किया.

उत्पादन क्षेत्र में विस्तार की वृहद कार्ययोजना

राज्य में वर्तमान स्थापित क्षमता लगभग 30,671 मेगावाट है. आने वाले वर्षों में 32,100 मेगावाट की नई परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए हैं, जिनमें थर्मल, न्यूक्लियर, सोलर और पम्प स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं. लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावित हैं. इसके जरिए 12,100 मेगावाट थर्मल, 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2,500 मेगावाट सोलर और 13,300 मेगावाट पम्प स्टोरेज शामिल है. इसके साथ कोरबा और मड़वा में नई सुपर क्रिटिकल इकाइयों पर कार्य प्रगति पर है.

ट्रांसमिशन नेटवर्क को किया जा रहा मजबूत

केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं बल्कि ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में प्रदेश सरकार काम कर रही है. जनवरी 2026 तक उपकेंद्रों की संख्या बढ़कर 137 हो गई है. पिछले दो वर्षों में 5 नए उपकेंद्र जुड़े. ट्रांसफॉर्मर क्षमता 24,227 MVA (2023) से बढ़कर 27,883 MVA हुई. 797 सर्किट किमी नई लाइनों का विस्तार किया गया. 5200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर बिछाकर 131 उपकेंद्र जोड़े गए. अगले तीन वर्षों में 41 नए उच्च दाब उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे.

उपभोक्ता संख्या 65.6 लाख से हुई पार

उपभोक्ता के स्तर पर बात करें प्रदेश में कुल उपभोक्ता संख्या बढ़कर 65.6 लाख से अधिक हो चुकी है, जिसके साथ अधिकतम मांग 7003 मेगावाट तक पहुँची चुकी है. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए 11 केवी लाइनें 1.45 लाख किमी तक विस्तारित की गई है. वहीं 29,379 नए 11/0.4 केवी उपकेंद्र जोड़े गए हैं.

नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज

राज्य सरकार ने ऊर्जा के प्रत्येक विकल्प पर न केवल विचार किया है, बल्कि उनको अमलीजामा पहनाने में जुटी हुई है. इस क्षेत्र में विस्तार करते हुए राज्य सरकार 2000 MWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम 2027-28 तक स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है. इसके साथ कोरबा में 500 MWh BESS और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं. इसके साथ सोलर सिंचाई, सोलर पेयजल और सोलर हाईमास्ट योजनाओं के तहत हजारों इकाइयां स्थापित होंगी.

सूर्यघर योजना के लिए सवा लाख लोगों ने कराया पंजीयन

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के लिए किए जा रहे व्यापर प्रचार-प्रसार का नतीजा आज धरातल पर नजर आ रहा है. योजना के तहत 1.32 लाख पंजीयन किए गए हैं, 8.30 लाख किसानों को कृषि पंपों पर सब्सिडी, 14.99 लाख बीपीएल उपभोक्ताओं को 30 यूनिट मुफ्त बिजली और मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक खपत पर रियायत दी गई है.

राजधानी में अंडरग्राउंड केबल योजना

रायपुर और बिलासपुर में हजारों किमी ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा. रायपुर में 7,600 करोड़ और बिलासपुर में 3,100 करोड़ रुपये व्यय का अनुमान है.