पटना। बिहार विधानमंडल में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार राजस्व वसूली में बुरी तरह विफल रही है। 31 मार्च 2023 तक कुल 4844 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया है, जिसमें से 1430.32 करोड़ रुपये तो पिछले पांच वर्षों से लंबित हैं।
परिवहन विभाग और ITC का अनोखा घोटाला
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा परिवहन और वाणिज्य कर विभाग से जुड़ा है। पटना में एक ट्रांसपोर्टर ने दोपहिया वाहन (बाइक) के जरिए 2.32 करोड़ रुपये के माल की ढुलाई दिखा दी। इस फर्जीवाड़े के आधार पर 19.32 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ट्रांसफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, चोरी हो चुके और कबाड़ बन चुके 9 वाहनों के नंबर पर भी ई-वे बिल जारी किए गए। कैग ने 12 अंचलों की जांच में पाया कि 22 करदाताओं ने तय सीमा से 253 करोड़ रुपये अधिक का ITC ले लिया।
नाबालिग को PM आवास और सब्सिडी में खेल
भ्रष्टाचार की जड़ें समाज कल्याण योजनाओं तक फैली हैं। 2019-2022 के बीच 21 ऐसे संपन्न परिवारों को प्रधानमंत्री आवास दे दिया गया, जिनके पास पहले से पक्का मकान था। हद तो तब हो गई जब जीवित माता-पिता के रहते नाबालिगों को आवास आवंटित कर ढाई लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा, फसल सब्सिडी के वितरण में भी भारी अनियमितता पाई गई है।
सदन में सियासी घमासान
इन खुलासों के बाद विपक्ष हमलावर है। राजद विधायक राहुल शर्मा ने इसे ‘सृजन घोटाले’ से भी बड़ा बताते हुए कहा कि सरकार के पास तीन महीने तक पैसा दबा कर रखा गया। वहीं, सदन में ‘गौ हत्या’ और चंदे को लेकर भी राजद और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे विधानसभा में हंगामे के आसार बढ़ गए हैं।
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