रोहित कश्यप, मुंगेली। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने गुरुवार को मुंगेली जिले के विश्वप्रसिद्ध अचनाकमार टाईगर रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी का आनंद लेते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता को करीब से निहारा। राज्यपाल ने प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दौरे के दौरान राज्यपाल ने रिजर्व क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थान सिहावल का भी भ्रमण किया।

यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे मनियारी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। सिहावल क्षेत्र घने जंगलों, शांत प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां हिरण, जंगली हाथी, बाघ सहित कई दुर्लभ वन्य प्राणी अक्सर देखे जाते हैं। राज्यपाल ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए वन्यजीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से जंगली हाथियों के प्रशिक्षण और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए भी जरूरी दिशा-निर्देश प्रदान किए।

अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि अचानकमार टाइगर रिजर्व मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में से एक है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, हिरण और हाथियों की बड़ी संख्या पाई जाती है। गौरतलब है कि अचानकमार टाईगर रिजर्व छत्तीसगढ़ का प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है और यह युनेस्को के अधीन घोषित अचानकमार – अमरकंटक बायोंस्फीयर रिजर्व का हिस्सा भी है। अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने साल वनों, दुर्लभ वन्यजीवों और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राज्यपाल ने महिलाओं की कलाकृतियों को सराहा

इस अवसर पर राज्यपाल ने आदिवासी अंचल की महिलाओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बैगा और गोंड जनजाति की पारंपरिक ट्राइबल पेंटिंग्स तथा स्थानीय हस्तशिल्प को बेहद आकर्षक बताते हुए आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा को सराहा। दौरे के अंत में कलेक्टर कुंदन कुमार ने राज्यपाल को जनजातीय कला पर आधारित स्मृति चिन्ह तथा प्राकृतिक कोसे से निर्मित शॉल भेंट कर सम्मानित किया।