Former Ambassador UAE Hussain Hassan Mirza: अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 11वां दिन हैं। अमेरिका-इजराइल के सामने ईरान हार मानने को तैयार नहीं है। ईरान और इजरायल (Iran and Israel) एक-दूसरे पर मिसाइलें-ड्रोन दाग रहे हैं। दोनों के इस तनाव ने मिडिल ईस्ट में संकट खड़ा कर दिया है। ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, इराक, कुवैत समेत कई देशों में मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। इसी बीच ईरान-इजरायल युद्ध पर भारत में UAE के पहले राजदूत रहे हुसैन हसन मिर्जा ने बड़ी बात कही है। हुसैन हसन मिर्जा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की एक कॉल से ईरान-इजरायल युद्ध खत्म हो सकता है।

हुसैन हसन मिर्जा ने भारत के डिप्लोमैटिक स्टैंड और दोनों देशों के साथ पीएम मोदी के रिश्ते पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है। भारत की प्रोफाइल… सिर्फ यह बात कि प्रधानमंत्री मोदी का एक फोन कॉल इजरायल और ईरान दोनों को रोकने के लिए काफी है। सिर्फ एक फोन कॉल।

यूएई के पूर्व राजदूत ने कहा कि पीएम मोदी हाल ही में इजरायल गए थे और ईरान के साथ भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि मिस्टर मोदी 10 दिन पहले इजरायल में थे। मिस्टर मोदी के ईरान के साथ बहुत, बहुत अच्छे रिश्ते हैं। वह ईरान के तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं। बहुत आसान है। मिस्टर मोदी के एक फोन कॉल से समस्या हल हो जाएगी।

हुसैन हसन मिर्जा ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत डिप्लोमैटिक तरीके से दखल देगा, क्योंकि UAE में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय हैष UAE में लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि UAE ने अपने इलाके से ईरान के खिलाफ कभी भी किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि कुवैत और कतर जैसे दूसरे खाड़ी देशों ने भी अपनी जमीन से ईरान के खिलाफ हमलों की इजाजत नहीं दी है।

ईरान जंग पर ट्रम्प के बयान से कच्चे तेल की कीमत गिरी

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि ईरान जंग बहुत जल्द खत्म हो सकती है। उनके इस बयान का ग्लोबल मार्केट पर पॉजिटिव असर पड़ा है। मंगलवार सुबह एशिया में कारोबार शुरू होते ही तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 8.5% गिरकर 92.50 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं अमेरिका में ट्रेड होने वाला तेल भी करीब 9% गिरकर 88.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि गिरावट के बाद भी तेल की कीमतें अभी युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले लगभग 30% ज्यादा हैं।तेल सस्ता होने से एशिया के शेयर बाजारों को भी फायदा मिला। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स करीब 2.8% बढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया के Kospi में 5% से ज्यादा की तेजी देखी गई।

दरअसल, एशिया के कई देश खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। इसलिए जब तेल महंगा होता है तो इन देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। अब कीमतें घटने से बाजार को थोड़ी राहत मिली है।

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