अविनाश श्रीवास्तव, रोहतास। बिहार के रोहतास में बीसैप 2 के कैंपस में सच्चिदानंद अखौरी शूटिंग प्रतियोगिता का भव्य समापन हो गया। इस पूरे प्रतियोगिता के दौरान अगर किसी ने सुर्खियां बटोरी तो वह थी एक घोड़ी कोमल, जिसकी रफ्तार और छलांग ने हर किसी को हैरान कर दिया। कोमल को उसके इस शानदार प्रदर्शन के लिए इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
कई राज्यों में पदक जीत चुकी है ‘कोमल’
दरअसल भोजपुर के अश्वारोही टीम की कोमल अपने कौशल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में बनी रही। अपनी शानदार जंप की बदौलत कोमल (घोड़ी) ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में गोल्ड सिल्वर तथा कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी है। कोमल जब अपने राइडर के साथ दौड़ती है, तो हवा से बातें करने लगती है।
रोहतास जिले के बीसैप 2 के कैंपस में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में राज्य भर के वाहिनियों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का समापन बेहद शानदार तरीके से हुआ, जहां कई खिलाड़ियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। लेकिन इस पूरे आयोजन में भोजपुर जिले के अश्वारोही टीम की घोड़ी कोमल चर्चा का केंद्र बनी रही।
डीजीपी ने पीठ थपथपा कर बढ़ाया हौसला
कोमल के प्रदर्शन को देखकर बिहार के डीजीपी विनय कुमार भी अपने आप को रोक नहीं सके और तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। इतना ही नहीं उन्होंने कोमल के प्रदर्शन को देखकर इतना गदगद हो गए की उन्होंने रायडर मनोज कुमार की पीठ थपथपा कर उनका और कोमल का हौसला बढ़ाया।
कोमल के रायडर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि, कोमल को भोजपुर जिले के आरा हेडक्वार्टर में ही ट्रेनिंग दिलाई गई है। यह ओपन जंपिंग सिक्स वार ऑल इंडिया में लगातार गोल्ड तथा सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुकी है। वह बताते हैं कि कोमल ने 1.55 सेंटीमीटर का हाईएस्ट जंप किया है।
कोमल के नाम अब तक 11 गोल्ड
मनोज बताते हैं कि वह 2005 से ही ऑल इंडिया चैंपियनशिप में हिस्सा लेते रहे हैं। घुड़सवारी में कोमल का कोई जवाब नहीं है। अब तक वह 11 गोल्ड, चार सिल्वर तथा 4 ब्रॉन्ज जीत चुके है। उन्होंने बताया कि, कोमल जिस नस्ल की घोड़ी है। उस नस्ल के घोड़ी बिहार में कही नहीं है। यह इकलौती है। यह काफी वफादार है, आज तक इसने कभी रायडर को धोखा नहीं दिया है। मनोज बताते हैं कि, उनकी बहाली 1997 में हुई थी। 2000 में घुड़सवारी को लेकर ट्रेनिंग हुई तब से ही कोमल उनके साथ है।
बिहार में थाईब्रिड नस्ल की कोमल का जवाब नहीं है। यह विदेशी नस्ल की घोड़ी है। 1.55 मीटर की हाईएस्ट छलांग अब तक यह लगा चुकी है। बिहार के अलावे अन्य राज्यों मे भी गोल्ड तथा सिल्वर अपने नाम कर चुकी है।
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