पूर्णिया/अरुणाचल। सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने और उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से पूर्णिया से शुरू हुई शौर्य वंदन यात्रा एक यादगार सफर बन गई है। इस यात्रा का सबसे अनूठा आकर्षण भारत के लाफिंग बुद्धा के रूप में विख्यात नागेश्वर दास रहे। अपने खास अंदाज और ठहाकों से उन्होंने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों में एक नया जोश भर दिया।
20 से अधिक कैंपों में हंसी का हथियार
दुनिया के दूसरे और भारत के पहले लाफिंग बुद्धा माने जाने वाले नागेश्वर दास ने इस 10 दिवसीय यात्रा के दौरान बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित 20 से ज्यादा सैन्य कैंपों का दौरा किया। उन्होंने जवानों को सिखाया कि युद्ध केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि मन के भीतर भी लड़ा जाता है। नागेश्वर दास के अनुसार, हंसी वह सबसे बड़ा हथियार है जो बिना किसी गोली-बारूद के इंसान को अंदर से ताकतवर बनाता है।
तनाव और डिप्रेशन पर प्रहार
जवानों को संबोधित करते हुए नागेश्वर दास ने प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा, सीमा पर दुश्मनों से लड़ना आपकी ड्यूटी है, लेकिन अपने अंदर के छिपे दुश्मनों जैसे तनाव, डिप्रेशन और बीमारियों को हराना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मुस्कुराता हुआ सैनिक दुश्मन के लिए सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक खतरा होता है। जब दुश्मन देखता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी जवान हंस रहा है, तो उसका हौसला अपने आप टूट जाता है।
गूगल पर पहचान और जवानों का उत्साह
नागेश्वर दास की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज वे गूगल सर्च में भी एक प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में उभर चुके हैं। यात्रा के दौरान जवानों का उत्साह देखते ही बनता था, कठिन ड्यूटी के बीच हंसी के इन पलों ने उनके मानसिक बोझ को कम करने में जादुई भूमिका निभाई। 10 दिनों की यह यात्रा केवल एक दौरा नहीं, बल्कि जवानों के दिलों को छू लेने वाला एक भावनात्मक अनुभव साबित हुई।
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