हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में 12 सितंबर को राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की अनुमति मांगी है, लेकिन पार्टी का दावा है कि तीन दिन से लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद अब तक अनुमति नहीं मिली है। परमिशन को लेकर अब कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव बता रही है, जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के चलते नेहरू स्टेडियम को खेल गतिविधियों के अलावा अन्य कार्यक्रमों के लिए देने पर रोक है।
‘परमिशन नहीं दी तो ईंट से ईंट बजा देंगे’
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने परमिशन में देरी को लेकर बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोला है।चौकसे ने कहा कि अगर राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी जाती है तो कांग्रेस ‘ईंट से ईंट बजा देगी।’उन्होंने राहुल गांधी को युवाओं और Gen Z का हीरो बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी को राहुल गांधी के युवाओं से संवाद करने से ‘फोबिया’ हो गया है और इसी वजह से अनुमति रोकने की कोशिश की जा रही है।हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। अनुमति रोकने के पीछे वास्तविक कारण प्रशासन और न्यायालय से जुड़े नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
‘तीन दिन से अधिकारियों के चक्कर, फिर भी अनुमति नहीं’
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले तीन दिनों से पार्टी के पदाधिकारी नेहरू स्टेडियम की अनुमति के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी है।चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस ने वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखी है। निगम कमिश्नर से मुलाकात के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।अगर स्टेडियम की अनुमति नहीं मिलती है तो कांग्रेस कार्यक्रम के लिए दूसरे स्थान का विकल्प तलाश सकती है।
हाई कोर्ट की रोक, खेल के अलावा स्टेडियम नहीं दे सकते
पूरे विवाद पर इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि इंदौर हाई कोर्ट ने नेहरू स्टेडियम को खेल गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए देने पर रोक लगा रखी है।यही वजह बताई जा रही है कि कांग्रेस को कार्यक्रम के लिए स्टेडियम की अनुमति मिलने में अड़चन आ रही है।
‘हमें कोर्ट की रोक की जानकारी नहीं दी गई’
महापौर के बयान पर चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस को अधिकारियों की ओर से अब तक इस तरह की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन आधिकारिक तौर पर कोर्ट की रोक का हवाला देता है तो कांग्रेस कोर्ट का भी रुख करेगी।यानी अब मामला सिर्फ प्रशासनिक अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई तक पहुंचने के संकेत कांग्रेस ने दे दिए हैं।
मंच पर नेताओं की जगह छात्र होंगे
12 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को कांग्रेस राजनीतिक मंच के बजाय छात्रों के संवाद कार्यक्रम के रूप में पेश कर रही है।कांग्रेस के मुताबिक राहुल गांधी छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। बड़ी संख्या में छात्रों के कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है।खास बात यह बताई जा रही है कि मंच पर किसी राजनीतिक व्यक्ति को जगह नहीं दी जाएगी। मंच पर केवल चयनित छात्र नजर आएंगे और राहुल गांधी उनसे संवाद करेंगे।कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा, छात्रों के भविष्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की तैयारी में है।
नेहरू स्टेडियम की परमिशन बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई
राहुल गांधी का इंदौर दौरा अब सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव का नया मैदान बनता दिखाई दे रहा है।कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी राहुल गांधी के युवाओं से संवाद से घबरा रही है, जबकि बीजेपी की ओर से स्टेडियम को लेकर न्यायालय के आदेश का हवाला दिया जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है—12 सितंबर को राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम में होगा या कांग्रेस को वैकल्पिक जगह तलाशनी पड़ेगी? और अगर अनुमति नहीं मिलती है, तो कांग्रेस के ‘ईंट से ईंट बजा देंगे’ वाले बयान के बाद इंदौर की सियासत किस दिशा में जाती है, यह देखना भी खास होगा।


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