कुंदन कुमार/​पटना। बिहार की राजधानी पटना की हाई प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार को बदलकर नीरज सिन्हा को चुनावी मैदान में उतारा है। इस बदलाव के साथ ही पटना की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद की जड़ नीरज सिन्हा का बायोडाटा है, जिसे पार्टी ने आधिकारिक रूप से जारी किया है।

​क्या है पूरा मामला?

​भाजपा द्वारा जारी बायोडाटा के अनुसार, नीरज सिन्हा का जन्म वर्ष 1994 में हुआ है, जबकि उन्होंने वर्ष 2006 में ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इस हिसाब से नीरज सिन्हा ने मात्र 12 साल की उम्र में पार्टी ज्वाइन की थी। इसी बिंदु को लेकर अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

​राजद का गंभीर आरोप

​राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने भाजपा पर बाल श्रम को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कार्यशैली का यह जीता-जागता प्रमाण है कि वे 12 साल के बच्चे को पार्टी की सदस्यता दे देते हैं। एजाज अहमद ने इसे बाल श्रम कानून का उल्लंघन बताते हुए कहा भाजपा के नेता देश को बताएं कि कैसे 12 साल का बच्चा पार्टी का सक्रिय सदस्य बन गया? क्या भाजपा को अपने उम्मीदवारों के चयन में कोई नैतिकता नहीं दिखती?

​विपक्ष ने उठाए नेतृत्व पर सवाल

​इस मामले को लेकर राजद ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा है। राजद प्रवक्ताओं का कहना है कि क्या पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास अपने क्षेत्र के लिए कोई योग्य और अनुभवी उम्मीदवार नहीं था? भाजपा नेता नितिन नवीन पर तंज कसते हुए विपक्ष ने कहा कि जनता के सामने भाजपा की कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहता है।
​राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या नीरज सिन्हा का यह बायोडाटा महज एक तकनीकी चूक है या फिर पार्टी ने बिना सोचे-समझे किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया है, जो जन प्रतिनिधि बनने की न्यूनतम शर्तों को पूरा नहीं करता। फिलहाल भाजपा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा की घेराबंदी तेज कर दी है। जनता के बीच अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या भाजपा इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ेगी या फिर यह विवाद आगामी चुनाव में उनके लिए मुसीबत बनेगा।