प्रमोद कुमार/कैमूर। बिहार के कैमूर जिले से एक अत्यंत घटना सामने आई है जहां अंधविश्वास के चलते एक महिला की असमय मौत हो गई। भभुआ थाना क्षेत्र के मनिहारी गांव में सर्पदंश का शिकार हुई महिला को परिजन अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने धाम ले गए, जिसके परिणामस्वरूप महिला ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने चार बच्चों के सिर से मां का साया भी छीन लिया है।
क्या है पूरा मामला?
मृतक महिला की पहचान अनिता देवी के रूप में हुई है। घटना के दिन अनिता अपने मायके में शाम के समय रसोई में खाना बना रही थी, तभी एक विषैले सर्प ने उसे डंस लिया। परिजनों को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली, उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय चैनपुर स्थित निमिया के सती माई धाम ले जाना उचित लगा। परिजनों का अटूट अंधविश्वास था कि झाड़-फूंक से महिला ठीक हो जाएगी। वहां घंटों तक झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार होने के बजाय वह लगातार बिगड़ती चली गई।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
जब महिला की हालत काफी नाजुक हो गई, तब घबराए परिजन उसे भभुआ सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते एंटी-वेनम इंजेक्शन लग जाता, तो अनिता की जान बचाई जा सकती थी।
चार बच्चे हुए अनाथ, परिवार में मातम
अनिता देवी पर दुखों का पहाड़ पहले ही टूट चुका था। दो वर्ष पूर्व ही उनके पति का निधन हो गया था। पति के निधन के बाद से वह अपने मायके में रहकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। अब अनिता की मृत्यु से उसके चारों बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। मृतिका के पिता धनंजय लोहार और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाली चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि अविलंब उपलब्ध कराई जाए, ताकि इन अनाथ बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके और उनका पालन-पोषण हो सके।
सरकारी दावों पर अंधविश्वास भारी
बिहार सरकार लगातार राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही है कि सर्पदंश की स्थिति में ओझा-गुनी या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और सीधे सरकारी अस्पताल जाएं। इसके बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर मौत के मुंह में समा रहे हैं। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है।

