“अंततः अच्छाई की बुराई पर विजय होती है” इस धारणा को पुष्ट करने वाली अंग्रेज़ी की एक प्रसिद्ध कहावत “Good triumphs over evil…” विजयादशमी पर्व का गुणगान कर रही है। आत्मविजय का महापर्व है विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन। रावण दहन का त्योहार विजयादशमी स्वयं के भीतर छिपी बुराइयों पर विजय पाने की शुरुआत का पावन अवसर है। अपने भीतर के दस दुर्गुणों-काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, ईर्ष्या, छल और अन्याय को चुन-चुनकर समाप्त करने के संकल्प के साथ ही रावण का पुतला जलाना सार्थक होगा। श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥
इस श्लोक के अनुसार काम, क्रोध और लोभ आत्मा का पतन करने वाले नरक के द्वार हैं इन तीनों का त्याग करना अति आवश्यक है। दूसरों की बुराइयाँ देखने से पहले स्वयं का आत्मविश्लेषण करने को भी सच्ची विजय कहा जा सकता है। रावण का अहंकार और उस अहंकार की वजह से उनके वध की कथा सभी जानते हैं। अँग्रेज़ी की यह पंक्ति “Pride comes before a fall.” इस भाव को प्रकट करने में काफ़ी हद तक सक्षम है कि अहंकार निश्चित रूप से पतन का कारण बनता है।
यतो धर्मस्ततो जयः। संस्कृत के इस सुभाषित का अर्थ है जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। रावण पर विजय पाने वाले भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सत्य, त्याग, करुणा, धैर्य, विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा, न्याय, परोपकार और धर्मपालन जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों पर अडिग रहने का संदेश है।यदि हम उनके इन गुणों को अपने आचरण में उतार सकें तो हमारा प्रत्येक दिन विजयादशमी बन सकता है।
निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥ रामचरित मानस की इस चौपाई का अर्थ है निर्मल मन वाला व्यक्ति ही प्रभु को प्राप्त कर सकता है। भगवान को छल-कपट से परे सच्ची निष्ठा प्रिय है।और सच्चे अर्थों में विजयी होने या सफ़ल होने के लिए भी छल-कपट से दूर रहना आवश्यक है।
आज होने वाले माँ दुर्गा का विसर्जन हमें जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिकता की स्थायी शक्ति का बोध कराता है। प्रतिमा का विसर्जन माँ की विदाई नहीं है यह उनके दिव्य गुणों को अपने हृदय में धारण करने का प्रतीक है। माँ दुर्गा की शक्ति मानव को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, निर्बलों की रक्षा करने और नकारात्मकता से संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।आज के दोनों महा पर्व वास्तविक उत्सव तब ही बन सकते हैं जब हमारे विचारों में पवित्रता, व्यवहार में विनम्रता और कर्मों में धर्म दिखाई दे।
“Charity begins at home…” इस अंग्रेज़ी proverb का अर्थ है सुधार की शुरुआत अपने घर और स्वयं से होनी चाहिए। बाहरी विजय, हमें सिर्फ़ उत्सव देती है लेकिन आंतरिक विजय जीवन को दर्शन देती है और उसे महान बनाती है। माँ दुर्गा की शक्ति, प्रभु श्रीराम की मर्यादा और स्व-विवेक को आधार बनाकर हम ऐसा समाज बना सकते हैं जहाँ सत्य, सद्भाव, न्याय और करुणा की विजय हो।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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