जांजगीर। डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 32 लाख के साइबर ठगी मामले में जांजगीर सायबर थाना ने इंदौर से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने मनीलॉड्रिंग के नाम पर सीबीआई का डर दिखाकर पीड़ितों को 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा था. इसी तरह के मामले में पुलिस ने पंजाब से एक आरोपी की गिरफ्तारी की थी. पूरे वाकये में बड़ी बात यह है कि आरोपियों की उम्र महज 21 और 24 साल है.

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प्रार्थी तुषारकर देवांगन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर सायबर ठगी के आरोपी विजय खन्ना, टेलीकॉम अथॉरिटी अधिकारी बनकर प्रार्थी के मोबाइल नंबर को मनीलॉड्रिंग के केश में उपयोग होना बताया और कोलाबा पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज होना बताया, जिसके बाद CBI अधिकारी बनकर फोन आया जिसे रिसीव करने पर मनीलॉड्रिंग के केश में डिजिटल अरेस्ट करना बताए.

प्रार्थी बुजुर्ग व्यक्ति थे, जिस कारण से डर गए एवं इसी डर का फायदा उठाकर प्रार्थी से 32 लाख रुए की ठगी पुलिस से सेटिंग करने के नाम पर किया गया. कुछ दिन में सभी मोबाइल नंबर बंद हो जाने से प्रार्थी ने अपने घर वाले को बताया, जिससे ठगी का एहसास हुआ. पीड़ित की रिपोर्ट पर धारा 318(4) 3(5) बीएन.एस. 66डी आई.टी एक्ट का अपराध पंजीबद्ध किया गया.

विवेचना के दौरान जिन खातों में पैसा गया है उनका पता किया गया जो स्लाइस स्मॉल फाइनेंश बैंक द्वारा खाता नंबर में पैसा जाना पाया गया. अन्य तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पुलिस टीम गठित कर इंदौर रवाना किया गया, जहां आरोपी सौम्य जैसवार पिता राजेश (21 वर्ष) निवासी प्रजापत नगर और देवराज अमकरे पिता रघुवीर (24 वर्ष) निवासी गुरु शंकर नगर, इंदौर को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ किया गया.

आरोपी के अपराध स्वीकार करने के बाद आरोपियों को विधिवत गिरफ्तारी कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. इस कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, PSI रुकसाना बनो , प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, HC विवेक सिंह, गिरीश कश्यप का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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