आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक काछनगादी रस्म में पनका-पनिका समाज की भूमिका और परंपराओं को लेकर अब समाज ने अपनी आवाज बुलंद की है। सोमवार को समाज के लोगों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।


समाज की सबसे बड़ी नाराजगी इस साल राष्ट्रपति के जगदलपुर प्रवास के दौरान काछनदेवी पीहू दास की जगह किसी अन्य कन्या को राष्ट्रपति से मिलवाए जाने को लेकर है। समाज का कहना है कि काछनगादी की परंपरा में पनका समाज की विशेष भूमिका रही है और इस तरह की चूक से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
दरअसल, बस्तर दशहरा की काछनगादी रस्म में पनका समाज की नौ वर्षीय कन्या कांटों के झूले पर लेटकर बस्तर दशहरा पर्व मनाने के लिए राजा को अनुमति देती है। समाज ने इस मामले में जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
इसके साथ ही समाज ने बस्तर दशहरा के दौरान बाहर से आने वाले समाज के हजारों लोगों के ठहरने के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया है। समाज लंबे समय से जगदलपुर में सामुदायिक भवन निर्माण की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं होने की बात कही जा रही है।

ज्ञापन के जरिए समाज ने काछनदेवी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा पनका-पनिका जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी है। अब समाज को उम्मीद है कि उनकी इन पांच सूत्रीय मांगों पर शासन और प्रशासन गंभीरता से विचार करेगा।
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