अभय मिश्रा, मऊगंज। जब कानून के रखवाले ही हाईवे के लुटेरे बन जाएं और खाकी वर्दी ‘गुंडा टैक्स’ वसूलने लगे, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक ऐसा ‘डिजिटल वसूली कांड’ सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है।

नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन ‘एटीएम मशीन’

महज 17 मिनट! जी हां, सिर्फ 17 मिनट के अंदर सौदेबाजी होती है और फोन-पे के जरिए 60 हजार रुपये की रिश्वत वसूल ली जाती है। नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन अब मऊगंज पुलिस के लिए कमाई की ‘एटीएम मशीन’ बन चुके हैं। यातायात प्रभारी नरेश सिंह, हनुमना थाने के एक आरक्षक और इन सबके बीच काली कमाई को सफेद करने वाला मुकेश त्रिपाठी! इन तीनों ने मिलकर ऐसा सिंडिकेट खड़ा कर दिया है, जिसके पक्के डिजिटल सबूत और स्टिंग ऑपरेशन की गवाही चीख-चीख कर सच बता रही है। आईजी के निर्देश पर एसपी मऊगंज ने जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ये दागी पुलिसवाले पक्के सबूतों के बाद भी अपनी कुर्सियों पर क्यों जमे हैं?

पुलिस के ‘प्राइवेट कैशियर’ मकेश कुमार त्रिपाठी

31 मई शाम 4 बजे मऊगंज बायपास पर गैलेक्सी होटल के पास हाईवे से गुजर रहे ट्रक नंबर (BR45 GB3523) को यातायात प्रभारी नरेश सिंह ने रोका। पहले दस्तावेजों के नाम पर धमकाया फिर शुरू हुआ खाकी का असली खेल। ट्रक ड्राइवर से सीधे 2 लाख मांग कर दी। धमकी मिली पैसे नहीं दिए तो गाड़ी जब्त होगी और 2 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी अलग से लगेगी। घबराया चालक अपने मालिक को फोन किया। मोटर मालिक अपने दोस्त आशीष पांडे से मदद मांगी तब इस कहानी में एंट्री हुई है पुलिस के ‘प्राइवेट कैशियर’ मकेश कुमार त्रिपाठी की।

हनुमना चेक-पोस्ट पर पहले डाटा एंट्री ऑपरेटर था

यह वही मुकेश है, जो कभी हनुमना चेक-पोस्ट पर डाटा एंट्री ऑपरेटर था, लेकिन चेक-पोस्ट बंद होने के बाद अब इसने अवैध वसूली की रकम को सफेद करने का ठेका ले लिया है। इस सौदेबाजी में हनुमना थाने के एक आरक्षक मीडिएटर’ बन यातायात प्रभारी के पास पहुंचा और अपने ही फोन से मुकेश से बात करवाया। 2 लाख की ये अवैध वसूली 70 हजार में फिक्स हो गई। इसके बाद शुरू हुआ फोन-पे का खेल। महज 17 मिनट के अंदर शाम 5.28 पर 30 हजार, 5.37 पर 20 हजार और 5.45 पर 10 हजार रुपये यानी कुल 60 हजार रुपये सीधे दलाल मुकेश त्रिपाठी के खाते में चले गए। बाकी बचे 10 हजार के लिए मोटर मालिक के मित्र का फोन घनघनाता रहता है।

ट्रकों को रोकने का अधिकार किसने दिया?

वाहन मालिक और उनके मित्र आशीष पांडे ने इस पूरी लूट का पर्दाफाश किया। पुलिस की अवैध वसूली के कारण वाहन मालिक की गाड़ी की किस्त टूट चुकी है और उसका व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो गया है। मऊगंज में यह खेल नया नहीं है। आखिर बिना खनिज विभाग के किसी कार्यवाहक एएसआई को नेशनल हाईवे पर ट्रकों को रोकने का अधिकार किसने दिया? अगले ही दिन तीन और ट्रेलरों को पकड़कर उनसे 6-6 हजार की डिमांड की गई, जो अंततः 500-500 रुपये की रिश्वत और 2000 के चालान पर जाकर सेटल हुई ऐसा आरोप वाहन चालकों का है।

जांच शुरू भी हो चुकी

इस पूरे खेल में हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकड़े और वहां के कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब इस ‘खुली लूट’ और फोन-पे के पक्के सबूतों को लेकर रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत से सवाल किया, तो उन्होंने तुरंत मऊगंज SP सुरेंद्र जैन को जांच के निर्देश दिए। जांच शुरू भी हो चुकी है। अगर पुलिस निष्पक्षता से मुकेश त्रिपाठी और इन पुलिसवालों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाले, तो मामला पानी की तरह साफ हो जाएगा।

पीड़ित वाहन चालक

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