पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए सोमवार का दिन पूर्व सीएम ममता बनर्जी के लिए झटके लेकर आया। पहले लोकसभा सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया, तो दूसरी ओर पार्टी के 101 पार्षदों ने एक के बाद एक सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद नगरपालिकाओं में इस्तीफों की लहर चल रही है।

विधानसभा चुनाव नतीजों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इसके बाद से ममता बनर्जी की पार्टी आंतरिक टकरावों और बगावत का सामना कर रही है।

पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी बिखरने लगी है. सत्ता परिवर्तन के बाद बंगाल में तृणमूल कांग्रेस बड़े सियासी संकट से गुजर रही है. राज्य की अलग-अलग नगरपालिकाओं से तृणमूल के 101 पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. ये इस्तीफे विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह, दलबदल और बगावत काफी बढ़ गए हैं.

101 पार्षदों ने इन जगहों से इस्तीफा दे दिया है- उत्तर बैरकपुर- 15, गारुलिया- 18, कोंटाई- 14, हालिसहार- 16, भटपारा- 30, डायमंड हार्बर- 8

mamata banerjee party tmc crisis 91 councillors resignation in bengal - हार  के बाद बिखरने लगी ममता बनर्जी की TMC? 91 पार्षदों ने दे दिया सामूहिक इस्तीफा  | Jansatta

डायमंड हार्बर नगरपालिका में सोमवार तृणमूल कांग्रेस के 8 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. यह इलाका टीएमसी का गढ़ माना जाता है. यहां से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. बता दें कि बंगाल में जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब से तृणमूल की हालत खराब होने लगी है.

इस समय ममता बनर्जी के सामने पार्टी को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है. साल 2011 में 35 साल के वाम शासन को खत्म कर सत्ता में आने वाली ममता को 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी. 15 साल तक बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को संगठित करना है.

कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने कहा था कि जिन नेताओं को पार्टी छोड़नी है, वो छोड़ सकते हैं. मैं पार्टी फिर खड़ी कर लूंगी. ममता ने यह बयान सत्ता गंवाने के बाद पार्टी नेताओं के साथ हुई एक बैठक में दिया था. ममता ने साफ कहा था कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे जा सकते हैं. उन्हें किसी के जाने की परवाह नहीं है. वे अकेले दम पर पार्टी को फिर से खड़ा कर लेंगी.

टीएमसी के पार्षदों का बड़े स्तर पर इस्तीफा देना संकेत दे रहा है कि पार्टी का नगरपालिका नेटवर्क और बूथ स्तर पर संगठन तेजी से सिकुड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी को जमीनी स्तर पर बगावत का सामना करना पड़ रहा है. इस समय तृणमूल कांग्रेस एक बड़े रजनीतिक संकट से गुजर रही है. वर्तमान राजनीतिक दौर में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को संगठित रखना है.

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