नितिन नामदेव, रायपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर में व्याप्त प्रशासनिक अनियमितताओं, छात्र विरोधी नीतियों एवं भ्रष्टाचार के आरोपों के विरोध में 15 सूत्रीय मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय का घेराव किया।
अभाविप ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सेवा समाप्ति की कार्यवाही के बावजूद पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद अली को बिना किसी वैधानिक आदेश के पुनः विश्वविद्यालय में प्रवेश दिया गया है। साथ ही वर्ष 2019 में डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाते हुए इसकी जांच की मांग की। परिसर में लगभग ₹7 करोड़ की लागत से निर्मित नए ऑडिटोरियम की जर्जर हालत हो चुकी है। इस निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त करते हुए अभाविप ने इसकी उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में कोर्सों के नाम परिवर्तित किए जाने से उत्पन्न भ्रम, परीक्षा अवधि में लगातार विद्युत बाधित होने, छात्रावास में दूषित पेयजल, मेस की निम्न गुणवत्ता, खेल सुविधाओं के अभाव, बस परिवहन की अव्यवस्था एवं विद्यार्थियों के लिए स्टूडियो सुविधाओं के उपयोग न होने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।


प्रदेश मंत्री अनंत सोनी ने कहा कि विश्वविद्यालय को शिक्षा एवं अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र होना चाहिए, न कि अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम। यदि सेवा समाप्ति के आदेश के बाद भी किसी व्यक्ति को विश्वविद्यालय में कार्य करने की अनुमति दी जाती है तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अभाविप के रायपुर महानगर मंत्री एवं विश्वविद्यालय छात्र सुजल गुप्ता ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ऑडिटोरियम उद्घाटन से पूर्व ही क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पहुंच गया है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। साथ ही छात्रावासों में शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, निर्धारित स्थान पर इंडक्शन उपयोग की अनुमति तथा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित स्टूडियो को विद्यार्थियों के लिए तत्काल संचालित करने की मांग भी की गई है।
घंटों चले प्रदर्शन एवं घेराव के पश्चात कुलसचिव ने अभाविप से चर्चा की। इस दौरान कुलसचिव ने डॉ. शाहिद अली से संबंधित मामले की जांच, ऑडिटोरियम निर्माण कार्य की तकनीकी जांच तथा विद्यार्थियों से जुड़ी अन्य समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। अभाविप ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन का सम्मान करते हुए फिलहाल आंदोलन स्थगित किया जा रहा है, किंतु यदि निर्धारित समयावधि में मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो परिषद भविष्य में शिक्षा मंत्री एवं राज्यपाल को भी ज्ञापन देंगे और उग्र आंदोलन भी करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
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