हेमंत शर्मा, इंदौर। उत्तर प्रदेश में मौलाना जर्जिस द्वारा दिए गए विवादित बयान के बाद पैदा हुए जन-आक्रोश पर जैन पंथ के वरिष्ठ धर्मगुरु आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले बयानवीरों को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी धर्मगुरु को अनर्गल टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
धर्म कोई नाम नहीं, हृदय की शुद्धता
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि चाहे कोई भी धर्मगुरु हो, उसका कर्तव्य समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव को बढ़ाना होना चाहिए।”धर्म न हिंदू है, न सिख, न मुस्लिम और न जैन। धर्म केवल हृदय की शुद्धता, करुणा, शांति और प्रेम है। जहाँ आत्मीयता बढ़े, वही वास्तविक धर्म है।”*
बरसों पुराने भाईचारे को लड़ाने की साजिश
मौलाना जर्जिस के बयान का नाम लिए बिना उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के घटिया और अनर्गल बयान सदियों से साथ रह रहे लोगों के बीच ज़हर घोलने का काम कर रहे हैं।शोभाहीन आचरण इस प्रकार की ओछी बयानबाजी न तो किसी धर्मगुरु की गरिमा को बढ़ाती है और न ही उस धर्म का मान रखती है।धर्म के नाम पर उपद्रव फैलाना और देश की फिज़ा (सौहार्द) बिगाड़ना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और वाहियात है।
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सरकार को दी दूरदर्शिता की सलाह
समाज में पनपते वैमनस्य पर चिंता जताते हुए आचार्य श्री ने केंद्र व राज्य सरकार से भी ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार कोअधिक दूरदर्शी (Visionary) होना पड़ेगा ताकि समाज में इस प्रकार का भय, भ्रम और विद्वेष पैदा ही न होने पाए।
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सभी धर्मगुरुओं से भावुक अपील
आचार्य सुनील सागर महाराज ने सभी धर्मों के प्रचारकों और गुरुओं से संयम बरतने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं के मुख से केवल ऐसे विचार और शब्द निकलने चाहिए जो लोगों में जीवन का संचार करें, उन्हें उत्तम मार्ग दिखाएं और आपसी आत्मीयता को मजबूत करें।
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