हेमंत शर्मा, इंदौर। अब तक सड़कों पर अवैध शराब के ठिकाने नजर नहीं आ रहे थे या फिर कार्रवाई नहीं हो रही थी, लेकिन जैसे ही डिप्टी एक्साइज कमिश्नर इंदर सिंह जामोद खुद सड़क पर उतरे, आबकारी विभाग की कार्रवाई अचानक तेज हो गई। एक ही रात में 40 स्थानों पर अवैध शराब मिली और 40 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए। महू से लेकर मांगलिया टोल नाके तक ढाबों, बारों, शराब के संभावित ठिकानों और परिवहन वाले स्थानों पर सघन चेकिंग कराई गई। इस दौरान 300 लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की गई।
अफसर सड़क पर उतरे तो 40 केस!
शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक चले अभियान में 83 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों की 12 टीमें मैदान में उतारी गईं।
पांच घंटे की कार्रवाई में—
40 जगह अवैध शराब मिली।
40 लोगों पर प्रकरण दर्ज हुए।
300 लीटर से ज्यादा शराब जब्त हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डिप्टी कमिश्नर खुद सड़क पर उतरे तो इतनी बड़ी संख्या में अवैध शराब मिल गई, तो स्थानीय आबकारी अमला इससे पहले क्या कर रहा था?
क्या बिना बड़े अफसर के नहीं होती कार्रवाई?
इसी कार्रवाई ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर संवेदनशील इलाकों, ढाबों और शराब के संभावित ठिकानों की नियमित निगरानी होती है, तो फिर अचानक हुई चेकिंग में इतने मामले कैसे सामने आ गए?सूत्रों के मुताबिक विभाग में कथित ‘बंदी’ के कारण कार्रवाई प्रभावित होने की चर्चा भी है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सवाल फिर वही है- क्या कार्रवाई के लिए डिप्टी कमिश्नर का खुद सड़क पर उतरना जरूरी है?
स्थानीय अफसरों पर भी कार्रवाई की चेतावनी
असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर अभिषेक तिवारी के मुताबिक डिप्टी कमिश्नर ने साफ निर्देश दिए हैं कि अवैध शराब की बिक्री और परिवहन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सर्कल अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं और लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। एक रात की कार्रवाई ने बड़ा सवाल छोड़ दिया—अगर डिप्टी कमिश्नर खुद नहीं उतरते, तो क्या ये 40 मामले सामने आते? सवाल 40 केस का नहीं, सवाल उस निगरानी व्यवस्था का है जो वरिष्ठ अधिकारी के मैदान में उतरते ही अचानक सक्रिय हो गई।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m



