हेमंत शर्मा, इंदौर। सरकारी अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए मशीनों का इंतजार करते रहे, लेकिन दूसरी तरफ उन्हीं बंद और कबाड़ हो चुकी मशीनों के मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान होता रहा। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से सामने आया यह मामला अब बड़ा घोटाला बनता नजर आ रहा है। वर्षों तक बंद पड़ी मशीनों पर सरकारी खजाने से रकम निकलती रही और किसी जिम्मेदार अधिकारी ने सवाल तक नहीं उठाया। मामला सामने आने के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन हरकत में आया है।
डीन ने lalluram.com से खास बातचीत में स्वीकार किया कि कंपनी के पिछले छह महीने के बिलों का भुगतान रोक दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। डीन के मुताबिक वर्ष 2021 से 2026 के बीच कंपनी ने करीब 40 से 50 लाख रुपए उन मशीनों के मेंटेनेंस के नाम पर वसूल लिए, जो या तो वर्षों से बंद थीं या पूरी तरह कबाड़ बन चुकी थीं। सवाल यह है कि जब मशीनें चल ही नहीं रही थीं तो उनका मेंटेनेंस किस आधार पर किया गया और भुगतान किसकी अनुमति से जारी होता रहा?
इंजीनियर सस्पेंड, अधीक्षकों को नोटिस
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला किसी एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीन आने वाले आठ अस्पतालों के डीन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन जानना चाहता है कि आखिर वर्षों तक यह गड़बड़ी उनकी नजरों से कैसे बची और भुगतान की प्रक्रिया बिना आपत्ति के कैसे चलती रही। प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बायोमेडिकल इंजीनियर प्रेरक बसोड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सरकारी खजाने में चपत
वहीं संकेत दिए गए हैं कि जांच में जिन-जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यदि सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों से राशि की वसूली भी की जा सकती है। यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। जिन मशीनों के भरोसे गंभीर मरीजों का इलाज होना था, वे कबाड़ में पड़ी रहीं। मरीज सुविधाओं के अभाव में परेशान होते रहे, जबकि फाइलों में मशीनों का मेंटेनेंस जारी दिखाकर सरकारी खजाने से लाखों रुपए निकाल लिए गए।
मास्टरमाइंड कौन ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड कौन है? क्या सिर्फ एक इंजीनियर के निलंबन से जिम्मेदारी तय हो जाएगी या फिर उन अधिकारियों तक भी कार्रवाई पहुंचेगी जिन्होंने वर्षों तक बिना जांच के भुगतान को मंजूरी दी? फिलहाल एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच तेज कर दी है, लेकिन इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में मशीनों के रखरखाव और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

